– क्या भाजपा की बैसाखी पर मनोज पांडे की नैया पार लगेगी? कमल वर्मा / लखनऊ। रायबरेली जिले की 183-ऊंचाहार विधानसभा सीट प्रदेश की राजनीति में हमेशा से चर्चा का केंद्र रही है। लगातार तीन बार से सपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीतते आ रहे मनोज पांडेय के लिए 2027 की चुनाव की डगर कठिन माना जा रही है। वह पाला बदलकर भाजपा का दामन पहले ही थाम चुके हैं और अब मंत्री बनकर क्षेत्र में अपनी ठसक भी दिखा रहे हैं। एक तरफ क्षेत्र में चर्चा है कि ईडी से बचने के लिए भाजपा में आने के बाद मनोज के लिए डगर अब कठिन हो गई है, हांलाकि उनके समर्थकों की मानें तो चुनाव में मंत्री का पद उन्हे बूस्टर डोज का काम करेगा। कहा जा रहा कि यदि कांग्रेस के साथ सीटों के बटवारे में यदि सपा यह सीट छोड़ती है तो कांग्रेस से प्रत्याशी अजय पाल सिंह होंगे। फिर मनोज पांडेय को यहां से जीत पाना कठिन होगा।
बीते तीन चुनावों की स्थिति पर नजर डाली जाए तो मनोज पांडेय को यहां कड़े संघर्षों का सामना करना पड़ा है। 2012 के चुनाव में मनोज पांडेय बसपा प्रत्याशी उत्कृष्ठ मौर्य को मात्र 2,582 मतों से हरा सके थे। 2017 के चुनाव में उनके जीत का अंतर और भी कम हो गया था। इस चुनाव में भी वह भाजपा प्रत्याशी उत्कृष्ठ मौर्य को 1,934 वोट से ही हरा सके।
2022 के विधान सभा चुनाव में उन्हें थोड़ी बढ़त मिली थी। इस बार भाजपा ने यहां से अमर पाल मौर्य को खड़ा किया था। मनोज पांडेय ने अमर पाल को 6621 मतों से हराया था। इस बार वह भाजपा के पाले में खड़े हैं। हाल में पार्टी ने सपा से बगावत करने का तोहफा मंत्री पद देकर नवाजा है।
मंत्री मनोज पांडेय जिस सपा के टिकट पर चुनाव जीतते आ रहे थे, इस बार उसी पार्टी से उनका मुकाबला एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा वह कई तरह के आरोपों से घिरे हैं। आय से अधिक संपत्ति के मामले की पहले ही जांच हो चुकी है। जिस समय यह मामला अखबारों में चर्चा का विषय बना था, उसी के कुछ माह बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। चर्चा में तो यहां तक कहा जा रहा था कि ईडी से बचने के लिए ही पाला बदला है। कुल मिलाकर, ऊंचाहार विधानसभा सीट आने वाले चुनाव में रायबरेली की सबसे रोचक और चर्चित सीटों में से एक रहने वाली है, जहां हर राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में दिखाई दे रहा है। 2027 में होने वाला चुनाव निश्चित रूप से काफी दिलचस्प होगा ।