वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। नक्सलवाद जितनी बड़ी चुनौती, उतनी ही खतरनाक साम्प्रदायिकता भी है, उक्त वक्तव्य राज्यसभा में उपनेता विपक्ष एवं कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की शुरुआत कांग्रेस ने की थी और इस संघर्ष में पार्टी ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ला का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं ने अपनी जान गंवाई है।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि नक्सलवाद जितना खतरनाक जहर देश के लिए है, उतनी ही घातक साम्प्रदायिकता भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां नक्सली जंगलों में रहकर हिंसा फैलाते हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी समाज में साम्प्रदायिकता का जहर घोल रही है। उनके अनुसार भाजपा जाति और धर्म के आधार पर समाज को बांटने का काम कर रही है, जो देश की एकता, अखंडता और लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के समर्थन से देश से साम्प्रदायिकता को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उसे स्तरहीन और आधारहीन बताया। तिवारी ने जवाहरलाल नेहरू और बीजू पटनायक पर की गई टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि कश्मीर के बड़े हिस्से को बचाने में बीजू पटनायक की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, जब उन्होंने कठिन परिस्थितियों में सैन्य दल को श्रीनगर पहुंचाने का कार्य किया था।
प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके मातृ संगठन का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं रहा, बल्कि अंग्रेजों का सहयोग करने के आरोप रहे हैं। उन्होंने असम के घोषणा पत्र पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा के वादे झूठे साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि 15 लाख रुपये देने, हर साल दो करोड़ रोजगार सृजन और विदेशों से काला धन लाने जैसे वादे पूरे नहीं हुए। तिवारी ने दावा किया कि असम सहित पांचों राज्यों में जनता भाजपा की राजनीति को नकार देगी और पार्टी को हार का सामना करना पड़ेगा।