वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। स्टार्टअप इंडिया के दस वर्ष पूरे होने के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि भारत की स्टार्टअप क्रांति अब केवल आर्थिक गतिविधि तक सीमित नहीं रही, बल्कि राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई यह पहल आज ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ से आगे बढ़कर ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के लिए क्षमता निर्माण का प्रभावी माध्यम बन गई है। भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम नवाचार, रोजगार सृजन और अवसरों के विकेंद्रीकरण के साथ राष्ट्रीय आत्मविश्वास को सशक्त कर रहा है।
भारत की यात्रा एक वैश्विक बैक-ऑफिस से इनोवेशन आर्किटेक्ट बनने की रही है। रक्षा, अंतरिक्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में स्टार्टअप्स की सक्रिय भागीदारी से संस्थागत मजबूती को नई दिशा मिली है। iDEX जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से रक्षा स्टार्टअप्स को सशस्त्र बलों की जरूरतों से जोड़ा गया, जिससे रक्षा उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। आज निजी क्षेत्र कुल रक्षा उत्पादन में करीब 23 प्रतिशत का योगदान दे रहा है और 16 हजार से अधिक एमएसएमई इससे जुड़े हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र में 2014 में जहां एक स्टार्टअप था, वहीं आज 380 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स सक्रिय हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में इंडिया एआई मिशन के तहत स्वदेशी मॉडल और भारतीय भाषाओं पर आधारित समाधान विकसित हो रहे हैं। सेमीकंडक्टर, मैपिंग, एग्रीटेक और बायोटेक क्षेत्रों में भी स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिला है। इंस्पेक्टर राज से इनोवेशन राज की ओर यह बदलाव उद्यमियों को राष्ट्र-निर्माता के रूप में स्थापित करता है। स्टार्टअप इंडिया के दस वर्ष यह साबित करते हैं कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब समाज के लिए वास्तविक मूल्य सृजन की दिशा में आगे बढ़ चुका है।