वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। विश्व स्लीप डे 2026 के अवसर पर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग द्वारा “ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया एवं पॉलिसोमनोग्राफी” विषय पर सीएमई और हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (एनएएमएस) यूपी चैप्टर, इंडियन चेस्ट सोसाइटी (आईसीएस) यूपी चैप्टर तथा स्नोरिंग एंड स्लीप रिलेटेड ब्रीदिंग डिसऑर्डर्स सोसाइटी के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक ऐसा छिपा हुआ रोग है जो लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश मामलों का समय पर निदान नहीं हो पाता। उन्होंने बताया कि स्लीप एपनिया के लगभग 70 से 80 प्रतिशत मरीज मोटापे से ग्रस्त होते हैं और करीब 90 प्रतिशत मोटे व्यक्तियों में इस बीमारी की संभावना रहती है। विशिष्ट अतिथि पद्मश्री प्रो. राजेन्द्र प्रसाद और केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि पिछले दो दशकों में भारत में स्लीप एपनिया के मामलों में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन आम लोगों में इसकी जानकारी अभी भी सीमित है। प्रो. सूर्यकांत ने बताया कि जोर से खर्राटे आना, दिन में अत्यधिक नींद आना और नींद के दौरान सांस रुकना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत पल्मोनरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अजय कुमार वर्मा के स्वागत संबोधन से हुई। डॉ. विभा गंगवार, डॉ. अनिल कुमार सिंह, डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. आशीष झा और प्रो. सारिका गुप्ता सहित कई विशेषज्ञों ने स्लीप एपनिया के निदान, उपचार और इसके हृदय रोग व अन्य बीमारियों पर प्रभाव के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को पॉलिसोमनोग्राफी रिपोर्ट की स्कोरिंग, स्लीप स्टडी की व्याख्या और पीएपी उपकरणों के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का समापन आयोजन सचिव डॉ. हेमंत कुमार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।