वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
प्रयागराज / लखनऊ। मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेला क्षेत्र में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित मारपीट और विवाद को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस घटना पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी सरकार और प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हुए कड़ा हमला बोला है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को घोर निंदनीय बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
रविवार को संगम तट पर मौनी अमावस्या स्नान के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और उत्तर प्रदेश के गृह सचिव मोहित गुप्ता तथा पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बहस देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। आरोप है कि इस घटना से आहत होकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या का स्नान करने से इनकार कर दिया और बीच रास्ते से ही अपनी पालकी अखाड़े में वापस ले गए। इस घटनाक्रम के बाद साधु-संतों में रोष फैल गया।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि माघ मेला क्षेत्र में पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी साधु-संतों और श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार अक्षम्य है। उन्होंने कहा कि सदियों पुरानी शाही स्नान की सनातनी परंपरा में बार-बार व्यवधान डालना भाजपा सरकार के कुशासन और नाकाम व्यवस्था को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी घटनाएं भाजपा सरकार में ही क्यों हो रही हैं, जबकि मौनी अमावस्या का शाही स्नान कोई नई परंपरा नहीं है। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि शासन और प्रशासन को हर जगह ‘मुख्य’ बनने का अहंकार नहीं पालना चाहिए। यदि गृह सचिव ने अपने स्तर पर यह कदम उठाया है तो यह गलत है और यदि किसी के निर्देश पर किया गया है तो मामला और भी गंभीर है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की।
इधर, योगी सरकार की ओर से माघ मेले में साधु-संतों और श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कराई गई। मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर भारी भीड़ उमड़ी और सुबह आठ बजे तक एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई।