– एम्स की मेडिकल टीम ने हरीश राणा के माता-पिता की काउंसलिंग भी की है, ताकि वे इस कठिन समय में मानसिक रूप से मजबूत रह सकें।
– देश में पहली बार किसी ने पाई इच्छामृत्यु,
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
नई दिल्ली। देश में इच्छामृत्यु को लेकर लंबी कानूनी और भावनात्मक जंग के बाद गाजियाबाद निवासी हरीश राणा की जीवन यात्रा का अंत हो गया। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) में भर्ती हरीश का निधन मंगलवार शाम 4:10 बजे हुआ। उनका अंतिम संस्कार बुधवार सुबह दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क में किया जाएगा।
हरीश को 14 मार्च को एम्स में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद उनकी जीवन रक्षक प्रणाली को धीरे-धीरे हटाना शुरू किया। पिछले कुछ दिनों से उन्हें भोजन और पानी भी नहीं दिया जा रहा था। इस दौरान मेडिकल टीम केवल उनकी पीड़ा कम करने और मानसिक शांति देने के लिए दवाएं देती रही। एम्स के डॉक्टरों ने हरीश के माता-पिता की काउंसलिंग भी की, ताकि वे इस कठिन समय में मानसिक रूप से मजबूत रह सकें।
यह मामला वर्ष 2013 से जुड़ा है, जब हरीश चंडीगढ़ में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र थे। रक्षाबंधन के दिन बहन से बात करते हुए वह पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित बताया, जिसमें उनके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वे बिस्तर तक सीमित हो गए। लंबे समय तक असहनीय दर्द और असहाय स्थिति में रहने के कारण उनके माता-पिता ने इच्छामृत्यु की अनुमति के लिए अदालत का रुख किया। पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2025 को याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी। करीब 13 साल तक चले इस संघर्ष के बाद हरीश को पीड़ा से मुक्ति मिली, जो देश में इच्छामृत्यु से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।