– भारत में No. 1 बेस्टसेलर
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। जनस्वास्थ्य और आपातकालीन जीवन रक्षक कौशल पर आधारित पुस्तक “साथी हाथ बढ़ाना: Emergency Response and Life-Saving Skills” ने भारत में Allied Health Services वर्ग में No. 1 बेस्टसेलर रैंक हासिल कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। यह सफलता न केवल लेखक सुनील कुमार यादव के लिए, बल्कि पूरे स्वास्थ्य समुदाय और जागरूक नागरिकों के लिए गर्व का विषय बन गई है।
पुस्तक के लेखक सुनील कुमार यादव, जो डॉ. एसपीएम सिविल हॉस्पिटल, लखनऊ में चीफ फार्मासिस्ट के पद पर कार्यरत हैं, एक अनुभवी स्वास्थ्य प्रशिक्षक और समाजसेवी भी हैं। वे लंबे समय से जनस्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और जीवन रक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अब तक वे 5000 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों और आम नागरिकों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। यह उनकी चौथी पुस्तक है, जो उनके अनुभव और समर्पण का परिणाम है।
यह द्विभाषी पुस्तक सरल, व्यावहारिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ तैयार की गई है। इसमें बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) की मूलभूत जानकारी, सीपीआर की चरणबद्ध प्रक्रिया, आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत उठाए जाने वाले कदम, हार्ट अटैक, दुर्घटना, चोकिंग और डूबने जैसी स्थितियों में जीवन बचाने की तकनीक को सहज भाषा में समझाया गया है। आम नागरिकों को ध्यान में रखकर लिखी गई यह पुस्तक हर वर्ग के लिए उपयोगी मानी जा रही है।
पुस्तक का लोकार्पण नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित संस्थान AIIMS में किया गया था, जिसके बाद इसे प्रिंट और डिजिटल मीडिया में व्यापक सराहना मिली। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने के बाद इसे पाठकों का अभूतपूर्व समर्थन प्राप्त हुआ और देखते ही देखते यह बेस्टसेलर सूची में शीर्ष पर पहुंच गई।
यह पुस्तक विशेष रूप से “पहले 5 मिनट” और “गोल्डन आवर” के महत्व को रेखांकित करती है, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में जीवन बचाने के लिए निर्णायक होते हैं। यह लोगों को न केवल जागरूक बनाती है, बल्कि उन्हें जीवन रक्षक बनने के लिए प्रेरित भी करती है।
इस उपलब्धि पर सुनील कुमार यादव ने कहा कि यह सफलता उनकी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की है जो किसी की जान बचाने का संकल्प रखता है। उन्होंने हर घर तक इस पुस्तक को पहुंचाने और हर नागरिक को जीवन रक्षक कौशल सिखाने का संकल्प दोहराया। साथ ही उन्होंने सभी पाठकों, सहयोगियों और स्वास्थ्य कर्मियों का आभार व्यक्त किया, जिनके समर्थन से यह पुस्तक जनआंदोलन का रूप ले रही है।