वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
वाराणसी। वाराणसी में सुरक्षा कारणों को लेकर यूपी ज्वेलर्स एसोसिएशन ने एक अहम फैसला लिया है। एसोसिएशन ने तय किया है कि बुर्का, नकाब, घूंघट, मास्क या हेलमेट पहनकर आने वाले ग्राहकों को ज्वैलरी नहीं बेची जाएगी। यह निर्णय चोरी, लूट और धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए लिया गया है। शनिवार को एसोसिएशन की वाराणसी इकाई ने इस संबंध में दुकानदारों को दिशा-निर्देश जारी किए।
प्रदेश अध्यक्ष सत्य नारायण सेठ ने बताया कि झांसी समेत कई जिलों में इसी तरह के पोस्टर लगाए जा चुके हैं। वाराणसी में ज्वैलरी की हजारों दुकानें हैं और सभी दुकानदार सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने दोहराया कि मुस्लिम ग्राहक बुर्का पहनकर आ सकते हैं, लेकिन लेनदेन के दौरान पहचान जरूरी है।
यूपी ज्वेलर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष कमल सिंह ने बताया कि हाल के दिनों में कई जिलों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें चेहरे ढककर आए लोगों ने वारदात को अंजाम दिया और पहचान मुश्किल हो गई। इसी कारण ज्वैलरी दुकानों के बाहर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि चेहरे को ढककर प्रवेश वर्जित है। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल दुकानदारों की सुरक्षा के लिए लिया गया है। यदि कोई ग्राहक बुर्का या हिजाब पहनकर आता है तो दुकान में प्रवेश से पहले पहचान के लिए चेहरा खोलना आवश्यक होगा।
हालांकि, इस फैसले को लेकर ज्वैलर्स के बीच मतभेद भी सामने आए हैं। लोहतिया क्षेत्र के ज्वैलर शाहिद ने इसका विरोध करते हुए कहा कि बुर्का पहनने वाले ग्राहकों को रोकना गलत है और इससे व्यापार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि महिला कर्मचारियों के माध्यम से पहचान सुनिश्चित की जा सकती है। सरकारी अधिवक्ता राणा संजीव सिंह ने इस फैसले को उचित बताते हुए कहा कि सुरक्षा हर व्यक्ति का अधिकार है और पहचान सुनिश्चित करना गलत नहीं है।