– 160 उद्यमियों ने महोत्सव में जमाया भरोसा
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र को नई गति देने में जुटी है। स्थानीय हुनर, पारंपरिक शिल्प और ग्रामीण उद्यम को आधुनिक बाजार से जोड़ने की रणनीति के सकारात्मक परिणाम ज़मीन पर दिखने लगे हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गोमती नगर में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के तत्वावधान में आयोजित “खादी महोत्सव–2025” का 30 नवंबर को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के प्रमुख सचिव अनिल सागर रहे। बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिशिर, संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी सिद्धार्थ यादव सहित विभागीय अधिकारी व कर्मचारी भी समारोह में मौजूद रहे।
प्रमुख सचिव अनिल सागर ने कहा कि प्रदेश सरकार खादी, ग्रामोद्योग और माटी कला जैसे पारंपरिक शिल्प को सहेजने के साथ-साथ उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने के लिये समर्पित भाव से कार्य कर रही है। महोत्सव में कुल 160 उद्यमियों ने भाग लिया, जिनमें खादी की 32, ग्रामोद्योग की 120 और माटी कला की 8 इकाइयाँ शामिल रहीं। इन उद्यमियों ने उत्पादों की गुणवत्ता, नवाचार और डिज़ाइन के दम पर आगंतुकों से भरपूर सराहना बटोरी।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली नौ इकाइयों को प्रमुख सचिव द्वारा राज्य स्तरीय सम्मान से नवाज़ा गया। खादी श्रेणी में स्वराज्य आश्रम, कानपुर को प्रथम, ग्राम सेवा संस्थान, फतेहपुर को द्वितीय और भूरज सेवा संस्थान, हरदोई को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। ग्रामोद्योग श्रेणी में अब्बास अंसारी, मुजफ्फरनगर प्रथम, तहजीबुल हसन, बिजनौर द्वितीय और जूट आर्टिज़ेन्स की संचालिका श्रीमती अंजली सिंह, लखनऊ तृतीय पुरस्कार की हक़दार बनीं। माटी कला श्रेणी में प्रेम चंद्र, बाराबंकी को प्रथम, मतलूब, बुलंदशहर को द्वितीय और शिव कुमार प्रजापति, बाराबंकी को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
रविवार का अवकाश और अंतिम दिन होने से प्रदर्शनी स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी। खादी वस्त्रों से लेकर ग्रामोद्योगी उत्पादों और माटी कला की वस्तुओं की जमकर ख़रीदारी हुई, जिसने उद्यमियों में नया आत्मविश्वास भरा। पुरस्कार वितरण के दौरान स्टॉल संचालकों और कारीगरों के चेहरों पर उत्साह साफ़ झलक रहा था। महोत्सव की बिक्री और प्रतिक्रिया ने यह साबित किया कि लखनऊ सहित प्रदेश का युवा उपभोक्ता भी स्थानीय उत्पादों को अपनाने में आगे है।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिशिर ने आयोजन संस्था, तकनीकी दल, स्वयंसेवकों, मीडिया प्रतिनिधियों, सुरक्षा दल और बोर्ड कर्मियों का आभार जताते हुए कहा कि सभी के समन्वित और अनुशासित प्रयास से कार्यक्रम को अपेक्षा से अधिक सफलता मिली। महोत्सव के समापन ने यह संदेश भी दिया कि खादी केवल विरासत का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल देने वाला आर्थिक साधन भी बन रही है।