वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। भारत के समावेशी और विकसित भविष्य की नींव भूमि है, चाहे वह घर हो, खेत हो या उद्योग। लेकिन दशकों से भूमि अभिलेखों की अपूर्णता, विवाद और अस्पष्ट स्वामित्व की समस्या ने नागरिकों को कई तरह की दिक्कतों में डाला है। इन्हीं चुनौतियों के समाधान के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने “नक्शा” कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह पहल भूमि प्रबंधन और प्रशासन में पारदर्शिता, सटीकता और डिजिटल सुविधा लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
“नक्शा” यानी राष्ट्रीय शहरी निवास-स्थल भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित भूमि सर्वेक्षण कार्यक्रम, भारत में भूमि अभिलेख प्रणाली को आधुनिक बना रहा है। यह ड्रोन सर्वेक्षण, जीएनएसएस मैपिंग और जीआईएस तकनीक की सहायता से सटीक भू-डेटा तैयार करता है। इस पहल के अंतर्गत नागरिकों को ‘योरप्रो’ कार्ड दिया जा रहा है, जो स्वामित्व का डिजिटल प्रमाण है और संपत्ति से संबंधित लेन-देन को सरल बनाता है। अब नागरिकों को संपत्ति की पुष्टि के लिए बिचौलियों या पुराने दस्तावेजों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे ऋण प्राप्ति, संपत्ति हस्तांतरण और विवाद निपटान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज हो गई है।
नक्शा कार्यक्रम केवल तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि नागरिक सशक्तिकरण और समानता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। नगरपालिकाओं और स्थानीय निकायों को अब सटीक भू-स्थानिक डेटा तक पहुंच मिल रही है, जिससे शहरी योजना, कर निर्धारण और अवसंरचना विकास में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है। नागरिक ऑनलाइन मानचित्र देख सकते हैं, आपत्तियाँ दर्ज कर सकते हैं और प्रक्रिया में भागीदार बन सकते हैं।
इस पहल का दायरा व्यक्तिगत स्वामित्व से आगे बढ़कर आपदा प्रबंधन और शहरी नीति निर्माण तक फैला है। ऊँचाई और स्थलाकृति संबंधी डेटा से बाढ़ या भूकंप जैसी आपदाओं की स्थिति में राहत कार्यों की गति और सटीकता बढ़ी है। सत्यापित डिजिटल रिकॉर्ड मुआवजा और सहायता को सही लाभार्थियों तक शीघ्र पहुँचाने में मदद करते हैं।
अनिवासी भारतीयों और दिव्यांग नागरिकों के लिए भी यह सुविधा वरदान साबित हो रही है, क्योंकि वे ऑनलाइन अपने संपत्ति रिकॉर्ड देख और सत्यापित कर सकते हैं। स्मार्ट सिटी, पीएम गति शक्ति और पीएम स्वनिधि जैसी राष्ट्रीय योजनाओं से जुड़कर “नक्शा” भारत के विकसित भविष्य का आधार बन रहा है। यह केवल भूमि नहीं, बल्कि नागरिकों के विश्वास, सुरक्षा और समान अवसरों का प्रतीक बनकर उभर रहा है—एक ऐसे भारत का, जो पारदर्शिता और सशक्तिकरण की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।