– #NoToDigital_YesTOPhysical_इंडिया
– परिवार और दोस्तों के बीच संवाद कम हो रहा है
– बच्चे और युवा डिजिटल दुनिया में उलझने के कारण वास्तविक दुनिया से कटते जा रहे हैं
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। इंटरनेट आज हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। शिक्षा, रोजगार, व्यापार, मनोरंजन और यहां तक कि दैनिक जरूरतों तक इंटरनेट का उपयोग होने लगा है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि इंटरनेट पर अत्यधिक निर्भरता समाज के लिए खतरनाक सिद्ध हो रही है। विशेषज्ञों और सामाजिक चिंतकों का मानना है कि यह एक बड़ी साजिश है जो धीरे-धीरे पूरी दुनिया को मानसिक रूप से पंगु बना रही है। आज डिजिटल इंडिया की बात हो रही है, जबकि वास्तव में हमें फिजिकल इंडिया की ओर बढ़ने की जरूरत है। प्रसिद्ध समाजसेवी आशीष तिवारी ने डिजिटल के बढ़ते कुप्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा।
श्री तिवारी ने बताया कि इंटरनेट के लगातार और अनियंत्रित इस्तेमाल से सबसे पहला और गहरा असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। घंटों मोबाइल, कंप्यूटर या टीवी स्क्रीन पर टिके रहने से आंखों में थकान, ड्रायनेस और मायोपिया जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। नीली रोशनी की वजह से नींद में खलल पड़ रहा है और लोग नींद संबंधी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। साथ ही शारीरिक गतिविधि में कमी के कारण मोटापा और अन्य रोग आम हो रहे हैं। इसके मानसिक और भावनात्मक प्रभाव भी उतने ही गंभीर हैं। सोशल मीडिया की लत ने युवाओं को तनाव और चिंता में डाल दिया है। लगातार दूसरों से तुलना और साइबरबुलिंग जैसी घटनाओं ने अवसाद को जन्म दिया है। वहीं शॉर्ट फॉर्म कंटेंट और लगातार नोटिफिकेशन की वजह से ध्यान और एकाग्रता कमजोर हो रही है। सामाजिक रिश्तों पर भी इसका बुरा असर दिख रहा है। परिवार और दोस्तों के बीच संवाद कम हो रहा है। आमने-सामने बातचीत करने की क्षमता घट रही है, जिससे अकेलेपन की समस्या बढ़ रही है। बच्चे और युवा वास्तविक दुनिया से कटते जा रहे हैं और डिजिटल दुनिया में ही उलझते जा रहे हैं।
श्री तिवारी ने बताया कि डिजिटल लत और समय प्रबंधन की समस्या ने तो उत्पादकता पर सीधा असर डाला है। पढ़ाई और काम पर ध्यान भटक रहा है और लोग समय का सदुपयोग नहीं कर पा रहे। इसके अलावा डेटा चोरी, हैकिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग और आकर्षक विज्ञापनों के चक्कर में अनावश्यक खर्च बढ़ रहा है, जबकि वित्तीय धोखाधड़ी से लोग आर्थिक नुकसान भी झेल रहे हैं। यह सच है कि इंटरनेट ने कई सुविधाएं दी हैं, लेकिन इसकी लत भविष्य की पीढ़ियों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। यह मानवता को खत्म कर देने वाला एक उपकरण साबित हो सकता है। यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाली पीढ़ियां मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर होकर एक तरह से निर्भर जीवन जीने को मजबूर होंगी। इसलिए आज जरूरत इस बात की है कि हम इंटरनेट का सीमित और नियंत्रित उपयोग करें। भारत को डिजिटल इंडिया नहीं, बल्कि फिजिकल इंडिया बनाने का संकल्प लेना होगा ताकि हमारी पीढ़ियां स्वस्थ, आत्मनिर्भर और सशक्त बन सकें।