वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, मंगलवार तीन मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रहण भारत में खंडग्रास रूप में दिखाई देगा। ग्रहण का स्पर्श और प्रारंभ देश में कहीं भी प्रत्यक्ष नहीं होगा, लेकिन चंद्रोदय के समय चंद्रमा ग्रहण से ग्रस्त अवस्था में दिखाई देगा और मोक्ष काल तक इसका दृश्य प्रभाव देखा जा सकेगा।
बताया गया है कि मंगलवार को चंद्रोदय शाम 5 बजकर 57 मिनट पर होगा। उसी समय चंद्रमा आंशिक रूप से ग्रस्त रहेगा। ग्रहण का मोक्ष शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा। इस प्रकार लगभग 50 मिनट तक चंद्रग्रहण का दृश्य प्रभाव रहेगा। यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में घटित होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन मास में पड़ने वाला यह चंद्रग्रहण नृत्य, संगीत और कला से जुड़े लोगों, श्रेष्ठ महिलाओं, सैनिकों और तपस्वियों पर विशेष प्रभाव डाल सकता है। मंगलवार के दिन ग्रहण होने के कारण सामाजिक स्तर पर भी हलचल या अशांति की आशंका व्यक्त की गई है, हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण एक खगोलीय घटना है।
ग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ माना जाएगा। सूतक लगने के बाद मंदिरों के कपाट बंद किए जा सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण काल में मंत्र जाप, ध्यान और ईश्वर की उपासना करना लाभकारी होता है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान का भी विशेष महत्व बताया गया है।