वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ. समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण प्रभावी साबित हो रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में संचालित यह योजना गरीब, वंचित और आवासहीन परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। योजना के माध्यम से जरूरतमंदों को केवल पक्का मकान ही नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षित जीवन का आधार भी मिल रहा है। फरवरी 2018 में शुरू की गई मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित है। योजना का उद्देश्य उन परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, जो अब तक कच्चे या जर्जर मकानों में रहने को मजबूर थे। योजना के तहत प्राकृतिक आपदाओं, कालाजार, जेई-एईएस और कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों के अलावा वनटांगिया, मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, पछइया लोहार, गढ़इया लोहार और बैगा जैसी जनजातियों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उनकी पहल पर दिव्यांगजन, 18 से 50 वर्ष तक की निराश्रित विधवा महिलाएं तथा सभी अनुसूचित जनजातियों को भी प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है।
योजना के तहत प्रत्येक पात्र लाभार्थी को आवास निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। साथ ही शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये और मनरेगा के तहत 90 मानव दिवस का रोजगार भी उपलब्ध कराया जाता है।
ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त गौरी शंकर प्रियदर्शी के अनुसार वर्ष 2018-19 से अब तक 4.72 लाख आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जिसमें से करीब 4.47 लाख आवास पूर्ण कराए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि योजना से बड़ी संख्या में दिव्यांगजन, निराश्रित विधवा महिलाएं और आपदा प्रभावित परिवार लाभान्वित हुए हैं।