– अगर आप ऑनलाइन सोना खरीद रहे हैं, तो खरीदारी से पहले यह जरूर जांचें कि प्लेटफॉर्म सेबी द्वारा रेग्युलेटेड है या नहीं, वरना आपकी चमकदार खरीदारी भारी नुकसान में बदल सकती है।
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। भारत में डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। यूपीआई ऐप्स से लेकर बड़े ज्वेलरी ब्रांड्स तक, अब लोग महज 10 रुपये में 24 कैरेट ई-गोल्ड खरीद रहे हैं। लेकिन अगर आप भी ऑनलाइन सोना खरीद रहे हैं, तो सावधान हो जाइए — बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने इस पर बड़ा अलर्ट जारी किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सेबी ने साफ कहा है कि डिजिटल गोल्ड उसके नियामक दायरे में नहीं आता। एक प्रेस रिलीज में सेबी ने चेतावनी दी कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ई-गोल्ड के नाम पर निवेशकों को उत्पाद बेच रहे हैं, जबकि ये न तो सिक्योरिटीज (Securities) में शामिल हैं और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव्स (Commodity Derivatives) के रूप में रेग्युलेटेड हैं। इसका मतलब है कि अगर किसी निवेशक को इसमें नुकसान होता है या कोई कंपनी दिवालिया हो जाती है, तो निवेशकों को सेबी के किसी भी सुरक्षा तंत्र से मदद नहीं मिल पाएगी।
सेबी के मुताबिक, निवेशकों को यह समझना चाहिए कि इस तरह के उत्पाद नियामक सुरक्षा के दायरे से बाहर हैं, इसलिए इसमें निवेश करने से पहले सतर्क रहना जरूरी है। डिजिटल गोल्ड का आकर्षण खासतौर पर युवाओं और पहली बार निवेश करने वालों के बीच अधिक है। इसकी सुविधा यह है कि खरीदार जितनी रकम का ई-गोल्ड खरीदता है, उतनी मात्रा में प्लेटफॉर्म फिजिकल गोल्ड रिजर्व कर देता है। खरीदार बाद में इसे ऑनलाइन बेच सकता है या सिक्कों और बार के रूप में डिलीवरी ले सकता है।
बताते चलें कि वर्तमान में इस क्षेत्र में एमएमटीसी-पीएएमपी, सेफगोल्ड और ऑग्मोंट गोल्ड जैसी प्रमुख कंपनियां सक्रिय हैं, जो गूगल पे, पेटीएम, फोनपे, अमेजन पे, ग्रो, जियो गोल्ड जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म और तनिष्क, कैरेटलेन, जोस अलुक्कास जैसे ज्वेलरी ब्रांड्स के माध्यम से सेवाएं दे रही हैं।
हालांकि, सेबी ने निवेशकों को सलाह दी है कि सोने में निवेश के लिए रेग्युलेटेड विकल्पों जैसे गोल्ड ईटीएफ (ETF) और ईजीआर (EGR) का इस्तेमाल करें। ये पूरी तरह नियामक सुरक्षा के दायरे में आते हैं और निवेशकों को बेहतर संरक्षण प्रदान करते हैं।
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