वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने अप्ट्रॉन कंपनी के पूर्व कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण का भुगतान न होने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। माननीय न्यायमूर्ति मनीष कुमार की एकल पीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पूर्व में दिए गए आदेशों का पालन न करना न्यायालय की अवहेलना है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि अप्ट्रॉन कंपनी बंद होने के बाद भी कर्मचारियों के लंबित भुगतान नहीं किए गए। इस पर पहले ही कोर्ट ने निर्देश दिए थे, लेकिन उनके अनुपालन में देरी पर अब न्यायालय ने कड़ा कदम उठाया है।
न्यायालय ने समग्र शिक्षा अभियान की महानिदेशक कंचन वर्मा (विपक्षी पक्ष संख्या-2) और अन्य एक अधिकारी के विरुद्ध जमानती वारंट जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह (विपक्षी पक्ष संख्या-3) को आदेश दिया गया है कि वे 15 सितम्बर 2025 को या तो अनुपालन से संबंधित शपथपत्र दाखिल करें या फिर व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर आरोप तय होने की कार्यवाही का सामना करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल विशेष अपील दायर करने की तैयारी, पूर्व के अंतरिम आदेशों की अनदेखी का बहाना नहीं बन सकती। प्रकरण को अब 15 सितम्बर से आरंभ होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध किया गया है।
इस याचिका में याची की ओर से अधिवक्ता सुमन पांडेय और शिवांग धीरज द्विवेदी ने पैरवी की। अदालत के इस सख्त रुख से प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।