– ‘साथी पकड़ा गया, मोबाइल तोड़ दो’…
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
बागपत। इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बनकर पॉलिसीधारकों से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गैंग का बागपत पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मेरठ और गाजियाबाद से गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक PhD छात्र, ग्रेजुएट, 12वीं पास और पूर्व बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं। आरोपित पॉलिसी रिन्यूअल, बोनस, टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और लैप्स पॉलिसी दोबारा शुरू कराने के नाम पर लोगों से रकम खातों में ट्रांसफर कराते थे।
मामला साइबर क्राइम थाने में दर्ज शिकायत से सामने आया। पीड़ित से पॉलिसी रिन्यूअल और अन्य प्रक्रिया के नाम पर करीब 2.88 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराए गए थे। जांच में पता चला कि रकम वास्तविक इंश्योरेंस कंपनी के खाते में नहीं गई। पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की जांच की तो गिरोह का नेटवर्क सामने आया।
पुलिस के अनुसार आरोपितों के पास पॉलिसीधारकों से जुड़ी जानकारी पहले से होती थी। इसी आधार पर फोन कर खुद को नामी इंश्योरेंस कंपनी का कर्मचारी बताते थे। पॉलिसी लैप्स होने, बोनस मिलने या टैक्स और प्रोसेसिंग शुल्क जमा करने का झांसा देकर रकम ट्रांसफर कराते थे। एनसीआरपी पोर्टल पर गिरोह से जुड़ी 51 शिकायतें मिली हैं, जिनमें करीब 1.20 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है। गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, लद्दाख और गोवा तक फैला था। आरोपित वाट्सएप ग्रुप के जरिये आपस में संपर्क में रहते थे। एक सदस्य की गिरफ्तारी के बाद ग्रुप में कथित तौर पर ‘साथी पकड़ा गया है, मोबाइल तोड़ दो’ संदेश भेजा गया। पुलिस इसे साक्ष्य मिटाने की कोशिश मानकर जांच कर रही है।
आरोपितों के कब्जे से स्कॉर्पियो, बाइक, 16 मोबाइल, सिम, बैंकिंग दस्तावेज, क्रेडिट कार्ड और सोने-चांदी के जेवर बरामद हुए हैं। एसपी सूरज कुमार राय ने लोगों से अधिकृत माध्यम से ही इंश्योरेंस संबंधी लेनदेन करने की अपील की है। पुलिस अब पॉलिसीधारकों का डेटा आरोपितों तक पहुंचाने वालों की तलाश कर रही है। टीम को 25 हजार रुपये का इनाम दिया गया है।