वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
वाराणसी। गंगा नदी की स्वच्छता से जुड़े नियमों की अनदेखी करना वाराणसी में संचालित अलकनंदा क्रूज को महंगा पड़ गया। गंगा में सीवेज युक्त गंदा पानी छोड़ने के आरोप में प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने अलकनंदा क्रूज लाइन पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया है और क्रूज प्रबंधन से लिखित स्पष्टीकरण तलब किया है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के आधार पर की गई, जिसमें क्रूज से सीधे गंगा नदी में मलजल गिरता हुआ स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।
पूरे घटनाक्रम का वीडियो नाविकों द्वारा बनाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे हड़कंप मच गया है। यूपी कांग्रेस ने भी इसपर सरकार को घेरा है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों ने कड़ा विरोध जताया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल एक जांच टीम का गठन किया। टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और संबंधित तथ्यों की जांच के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी। जांच में प्रथम दृष्टया नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने कार्रवाई की। नाविकों का आरोप है कि क्रूज में लगे शौचालयों का अपशिष्ट बिना किसी शोधन प्रक्रिया के नदी में प्रवाहित किया गया, जो गंगा की स्वच्छता और धार्मिक आस्था के साथ गंभीर खिलवाड़ है। जिलाधिकारी ने कहा है कि गंगा की पवित्रता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार गंगा जैसी पवित्र और जीवनदायिनी नदी में किसी भी प्रकार का प्रदूषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों के उल्लंघन पर आगे और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। जुर्माने के साथ ही क्रूज प्रबंधन को नोटिस जारी कर यह भी पूछा गया है कि उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों न की जाए। विवेकानंद क्रूज के संचालक ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि गंगा में जो पानी छोड़ा गया, वह केवल सामान्य पानी था, न कि मल-मूत्र।
प्रशासन ने क्रूज संचालक को भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराने की सख्त चेतावनी दी है। अधिकारियों का कहना है कि गंगा की स्वच्छता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।