– 5 क्षत्रिय पुरोधाओं को दी गई श्रद्धांजलि, वंशज हुए सम्मानित
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश क्षत्रिय लोक सेवक परिवार महासमिति द्वारा आयोजित क्षत्रिय पुरोधा श्रद्धांजलि समारोह-2026 में विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि बहादुरी किसी जाति या धर्म की मोहताज नहीं होती। जो भी व्यक्ति राष्ट्र की रक्षा, सम्मान और अखंडता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करता है, वही सच्चे अर्थों में क्षत्रिय है। उन्होंने कहा कि क्षत्रिय समाज ने सदैव शौर्य, त्याग और बलिदान की परंपरा को जीवित रखा है। रणभूमि में मातृभूमि की रक्षा के साथ-साथ नीति, मर्यादा, न्याय और कर्तव्यनिष्ठा का आदर्श प्रस्तुत करना ही इसकी पहचान रही है। ऐसे आयोजनों से समाज को अपने गौरवशाली अतीत से सीख लेने की प्रेरणा मिलती है।
महासमिति के अध्यक्ष बाबा हरदेव सिंह ने कहा कि यदि समाज अपने पुरोधाओं और पूर्वजों को भूल जाता है तो आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और संस्कारों से कट जाती हैं। इसी उद्देश्य से महासमिति ने हर वर्ष 25 क्षत्रिय पुरोधाओं को श्रद्धांजलि देने की परंपरा शुरू की है, जिससे युवा पीढ़ी अपने अतीत और विरासत से जुड़ सके। साहित्यकार विद्याबिंदु सिंह ने पितृ ऋण की परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुरोधाओं को स्मरण करना इतिहास को वर्तमान से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की प्रोफेसर लवली शर्मा ने ऐसे आयोजनों को समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला बताया। भातखंडे संस्कृत विश्वविद्यालय की कुलपति मांडवी सिंह ने कहा कि पूर्वजों की स्मृतियों को सहेजने का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों में इतिहास के प्रति सम्मान पैदा करेगा। महिला कल्याण निगम की अध्यक्ष कमलावती सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले क्षत्रिय पुरोधाओं के वंशजों को सम्मानित किया गया। यूपी कॉलेज के संस्थापक उदय प्रताप सिंह, आरबीएस कॉलेज के संस्थापक बलवंत सिंह, टीडी कॉलेज के संस्थापक तिलकधारी सिंह तथा इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के संस्थापक वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती सिंह के योगदान को स्मरण किया गया। कार्यक्रम संयोजक और पदाधिकारियों को भी सम्मानित किया गया। महासमिति की महामंत्री इंद्रासन सिंह ने स्वागत किया और अंत में एसकेडी अकादमी के संस्थापक एसकेडी सिंह ने आभार व्यक्त किया।
इन 25 क्षत्रिय पुरोधाओं को दी गई श्रद्धांजलि :
समारोह में प्राचीन से आधुनिक काल तक के 25 महान क्षत्रिय पुरोधाओं ऋषि विश्वामित्र, साध्वी सुलभा, भगवान महावीर, भगवान बुद्ध, भगवान राम, महाराज इक्ष्वाकु, महाराज मांधाता, महाराज भगीरथ, महाराज हरिश्चंद्र, महाराज अग्रसेन, सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, रानी दुर्गावती, सम्राट हर्षवर्धन, महाराज सुहेलदेव, वीर कुंवर सिंह, क्रांतिकारी बंधू सिंह, राणा वेणी माधव सिंह बैस, महाराज गंगा सिंह (बीकानेर), वीर चंद्र सिंह गढ़वाली, राजा उदय प्रताप सिंह, राजा बलवंत सिंह, श्रीमंत तिलकधारी सिंह, राजा युवराज दत्त सिंह तथा राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह-रानी पद्मावती को पुष्पांजलि अर्पित की गई।