वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
राजकोट। गुजरात के पारंपरिक शिल्प जसदण पटारी हैंडीक्राफ्ट को भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण की मान्यता मिल गई है। जीआई रजिस्ट्री की ओर से मिली इस मान्यता को राजकोट जिले के जसदण ब्लॉक के कारीगरों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पीढ़ियों से चली आ रही यह अनूठी हस्तकला गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने अपनी ग्राम्य विकास निधि (जीवीएन) के तहत इस जीआई पंजीकरण प्रक्रिया को सहयोग प्रदान किया। नाबार्ड की सहायता से उत्पाद के दस्तावेजीकरण, जागरूकता अभियान और जीआई आवेदन की औपचारिकताएं पूरी की गईं। इस पूरी प्रक्रिया का संचालन सेंटर फॉर एनवायरमेंट एजुकेशन (सीईई) के माध्यम से किया गया।
नाबार्ड इससे पहले भी गुजरात के दो प्रमुख उत्पादों को जीआई टैग दिलाने में सहयोग कर चुका है। इनमें कच्छ की अजरख ब्लॉक प्रिंट और नवसारी का अमलसाड चीकू शामिल हैं। दोनों उत्पादों को पहले ही सफलतापूर्वक जीआई पंजीकरण प्राप्त हो चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार जीआई टैग मिलने से किसी भी पारंपरिक उत्पाद को उसकी विशिष्ट पहचान मिलती है और नकली उत्पादों के खिलाफ कानूनी संरक्षण भी प्राप्त होता है। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्पाद की विश्वसनीयता बढ़ती है तथा बेहतर व्यापारिक अवसर उपलब्ध होते हैं।
नाबार्ड ने कहा कि जसदण पटारी हैंडीक्राफ्ट को मिली यह पहचान न केवल पारंपरिक ज्ञान और शिल्प कला के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी पैदा करेगी। इसके साथ ही युवा और महिला शिल्पकारों की भागीदारी बढ़ाने तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।