वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। 81 दिवसीय गौ रक्षार्थ धर्मयुद्ध गविष्ठी यात्रा के ऐतिहासिक समापन अवसर पर आयोजित गौ गर्जना अक्षौणी संकल्प सभा में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ माता के सम्मान और संरक्षण के लिए राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन को नई दिशा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के संकल्प के साथ देशभर में चरणबद्ध अभियान चलाया जाएगा, जिससे जनजागरण के साथ संगठनात्मक ढांचा भी मजबूत किया जा सके।
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि गौ माता को पशुओं की सूची से अलग कर भारत सरकार द्वारा उन्हें राष्ट्रमाता तथा राज्य सरकारों द्वारा राज्यमाता का दर्जा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, कृषि व्यवस्था और राष्ट्रजीवन में गौ माता का विशेष स्थान है। ऐसे में उनके सम्मान और संरक्षण के लिए व्यापक सामाजिक सहभागिता आवश्यक है।
उन्होंने आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत कार्ययोजना भी घोषित की। इसके तहत 14 से 17 अगस्त तक छत्तीसगढ़ के सलधा में देश की 403 विधानसभाओं के प्रतिनिधियों को नियुक्ति-पत्र दिए जाएंगे और चार दिवसीय कार्यशाला आयोजित होगी। श्रावण और भाद्रपद मास में एक नोट अभियान तथा रामा गौ सम्मान अभियान संचालित किया जाएगा। 30 जुलाई से 11 अगस्त तक एक काँवड़-एक गायक अभियान चलेगा। 11 से 21 अक्टूबर तक काशी में गो प्रतिष्ठा यज्ञ का आयोजन होगा, जबकि कार्तिक शुक्ल द्वितीया पर देशभर में गोवर्धन पूजा आयोजित की जाएगी।
शंकराचार्य ने बताया कि 14 नवंबर को देश के प्रत्येक गांव से एक देशी गौ माता और चार शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना के प्रतिनिधियों के साथ लखनऊ के लिए प्रस्थान किया जाएगा। इस अभियान में देशभर से लगभग दो अक्षौहिणी सेना के जुटने का लक्ष्य रखा गया है। 17 नवंबर को गोपाष्टमी के अवसर पर लखनऊ में गौ माताओं का भव्य स्वागत और राष्ट्रमाता पूजन होगा। इसके बाद 28 नवंबर को राष्ट्रमाता संकल्प के समर्थन में विशाल जत्था लखनऊ से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेगा।
सभा में मौजूद गौभक्तों ने गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल गौ संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, ग्राम्य अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय अस्मिता के संरक्षण का भी व्यापक अभियान है।