वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
प्रयागराज। आशुतोष ब्रह्मचारी पर नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़े मामले में पहले से दर्ज एफआईआर 58/2026 का दायरा बढ़ाते हुए व्यापक जांच के आदेश दिए गए हैं। इलाहाबाद की विशेष पॉक्सो अदालत के विशेष न्यायाधीश एवं अपर सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्य दंडीस्वामी प्रत्यक्चैतन्य मुकुंदानंद गिरि की याचिका पर यह आदेश दिया।
स्वामी मुकुंदानंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्र ने बताया कि अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए मुकुंदानंद गिरि को अपने पास उपलब्ध सभी दस्तावेजी, भौतिक, डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक और ऑडियो-विजुअल साक्ष्य झूंसी थाने में पहले से दर्ज एफआईआर के साथ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट को मामले की जांच का दायरा बढ़ाने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर व्यापक जांच करने को कहा है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियों को जांच का निष्कर्ष नहीं माना जाएगा। जांच अधिकारी अदालत की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच करें। यानी जांच के दौरान किसी व्यक्ति को अदालत की टिप्पणियों के आधार पर दोषी या निर्दोष नहीं माना जाएगा।
मामला जनवरी 2026 में सामने आया था। आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और अन्य के खिलाफ नाबालिगों के कथित यौन शोषण के आरोप लगाए गए थे। शिकायत में धार्मिक आयोजनों और गुरु सेवा के नाम पर नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया था। इसके बाद प्रयागराज की विशेष अदालत के निर्देश पर पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। अब अदालत के ताजा आदेश के बाद पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल करते हुए जांच का दायरा बढ़ाएगी।