वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के लिए उत्तर प्रदेश में केवल दो जगह हैं, जेल या जहन्नुम। नौ वर्ष पहले परिवारों के सामने चिंता रहती थी कि बेटी घर से निकलेगी तो सुरक्षित लौटेगी या नहीं, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। आज बेटी के सामने सवाल है कि उसे कहां तक जाना है और उसके सपने जहां तक ले जाएं, वहां तक पहुंचने के लिए सरकार उसके साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री बुधवार को पिंडरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित कामकाजी महिला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नारों से नहीं, बल्कि जमीन पर बदलाव से दिखाई देना चाहिए। सरकार ने पहले महिलाओं का डर दूर किया, फिर उन्हें शिक्षा, कौशल और रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की राह खोली।
योगी ने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति केंद्र, महिला बीट पुलिस अधिकारी और 1090 व 181 जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी की गई हैं। वर्ष 2017 में प्रदेश पुलिस में करीब 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं, जबकि अब यह संख्या 44 हजार हो चुकी है। नई भर्ती के बाद संख्या 50 हजार से अधिक होगी। तीन महिला पीएसी बटालियन भी बनाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत जन्म से स्नातक तक 25 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। कस्तूरबा गांधी विद्यालयों को 12वीं तक संचालित किया जाएगा। स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार मेधावी छात्राओं को जल्द रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना से जोड़ा जाएगा।
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में 28 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी नौ वर्षों में करीब 12 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो गई है। प्रोजेक्ट गंगा के तहत चार हजार महिला डिजिटल उद्यमी तैयार की जाएंगी।
योगी ने कहा कि नारी अब केवल परिवार की शक्ति नहीं, बल्कि प्रदेश और देश की आर्थिक शक्ति भी बनेगी। गरीब परिवार की बेटी पूंजी के अभाव में अपना सपना नहीं छोड़ेगी। सरकार अवसर देगी और महिलाएं अपने परिश्रम से नई ऊंचाइयां हासिल करेंगी।