वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने और सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रादेशिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) संवर्ग के सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों के पुनर्नियोजन की अधिकतम आयु सीमा 65 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस कदम से अस्पतालों में अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और मरीजों को समयबद्ध उपचार मिलने में मदद मिलेगी।
अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष के अनुसार, 500 निःसंवर्गीय पदों पर पीएमएचएस संवर्ग के सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों का पुनर्नियोजन किया जाएगा। नियुक्ति वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से अनुबंध के आधार पर होगी। यह व्यवस्था नियमित चिकित्साधिकारियों की नियुक्ति होने अथवा एक वर्ष की अवधि, जो भी पहले हो, तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद कार्य एवं आचरण, गुण-दोष तथा स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के आधार पर साल-दर-साल अवधि बढ़ाई जा सकेगी, लेकिन अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष होगी।
पुनर्नियोजित चिकित्सक कन्सलटेन्ट या परामर्शी के रूप में सेवाएं देंगे। उन्हें कोई प्रशासनिक पद या संवर्गीय पदनाम नहीं मिलेगा। अस्पताल की जरूरत के अनुसार आपातकालीन और आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं में भी उनकी सेवाएं ली जा सकेंगी। नियमित विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति के बाद संबंधित निःसंवर्गीय पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे और किसी भी स्थिति में ऐसे पदों की संख्या 500 से अधिक नहीं होगी।
उप मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता सरकार की प्राथमिकता है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह निर्णय चिकित्सा सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
पुनर्नियोजित विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। शर्तों का उल्लंघन करने पर पुनर्नियोजन तत्काल समाप्त किया जा सकेगा। सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त विशेषज्ञ एवं एमबीबीएस चिकित्सकों के पुनर्नियोजन का भी प्रावधान किया गया है, जबकि एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए 65 वर्ष तक की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी।