वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन सियासी दलों के बीच डिजिटल जंग शुरू हो चुकी है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर AI से तैयार वीडियो, मीम्स, रील्स और राजनीतिक संदेशों के जरिए अलग-अलग दल अपने पक्ष में नैरेटिव बनाने में जुटे हैं। इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स समेत अन्य प्लेटफार्मों पर सक्रिय कम से कम 15 राजनीतिक पेजों के विश्लेषण में इनके कुल 41 लाख से अधिक फॉलोअर सामने आए हैं।
इनमें भाजपा समर्थक सात पेजों के करीब 13.5 लाख फॉलोअर हैं। वहीं समाजवादी पार्टी समर्थक पांच पेजों की कुल फॉलोइंग करीब 15.6 लाख है। विश्लेषण में यह भी सामने आया कि भाजपा से जुड़े पांच पेज इसी साल मई-जून में बनाए गए, जबकि सपा समर्थक अधिकांश पेज कई वर्षों से सक्रिय हैं।
डिजिटल मुकाबला केवल पोस्ट और मीम्स तक सीमित नहीं है। भाजपा समर्थक इकोसिस्टम में ‘फ्रेंड्स ऑफ योगी’ जैसे प्लेटफार्म पर राजनीतिक संदेशों को गेम के रूप में भी पेश किया गया है। ‘बुलडोजर रन’ में बुलडोजर चलाने से लेकर ‘ऑपरेशन धर्म’ में एंटी-माफिया नैरेटिव और योगी आदित्यनाथ पर आधारित क्विज तक शामिल हैं।
भाजपा समर्थक पेजों की प्रमुख थीम योगी सरकार का विकास, कानून-व्यवस्था और सपा शासन से तुलना है। अखिलेश यादव को निशाना बनाने के लिए ‘टीपू’ जैसे संबोधनों और AI आधारित वीडियो का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके जवाब में सपा समर्थक पेज योगी आदित्यनाथ को ‘बाबा’ के रूप में निशाना बनाते हुए सरकार की नीतियों, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठा रहे हैं।
बसपा और कांग्रेस की डिजिटल मौजूदगी तुलनात्मक रूप से सीमित दिखती है। बसपा समर्थक पेज मायावती के शासन, आरक्षण और आकाश आनंद से जुड़े संदेशों पर जोर दे रहे हैं। कांग्रेस का फोकस AI कंटेंट से अधिक बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, आरक्षण और सरकार की नीतियों पर भाषणों व जनता की शिकायतों को सामने रखने पर है।
विश्लेषण से साफ है कि 2027 से पहले राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई सोशल मीडिया पर तेज हो रही है। हालांकि फॉलोअर संख्या सीधे राजनीतिक प्रभाव का पैमाना नहीं है, लेकिन रील्स, मीम्स, वेबसाइट और गेम के जरिए एक ही संदेश को बार-बार नए रूप में मतदाताओं तक पहुंचाने की कोशिश चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनती जा रही है।