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बिहार में नेता और भोजपुरी कलाकारों के बीच टकराव, रितेश ने कहा सम्राट चौधरी सांतवी फेल-हत्यारे हैं

– नृत्य और संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं।
– नृत्य की शुरुआत तो स्वयं भगवान शिव ने नटराज रूप में की थी, वहीं से नाच-गाना आया है।”
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। बिहार की सियासत में अब भोजपुरी फिल्मों की चमक और तंज का तड़का भी जुड़ गया है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव पर दिए गए विवादित बयान के बाद भोजपुरी कलाकारों में गुस्सा फूट पड़ा है। इस विवाद पर अब गायक और जन सुराज पार्टी के करगहर विधानसभा प्रत्याशी रितेश पांडे ने तीखा हमला बोला है।
रितेश पांडे ने सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा, “जो बिहार का डिप्टी सीएम सातवां फेल है, उससे और क्या उम्मीद की जा सकती है? एफिडेविट को ‘हाफडेबिट’ बोलने वाला जब कलाकारों का अपमान करेगा, तो जनता खुद जवाब देगी।” उन्होंने कहा कि नृत्य और संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। “अगर नाचना-गाना गलत है तो अमिताभ बच्चन भी नाचते हैं, फिर उन्हें भी ‘नचनिया’ कहिए। नृत्य की शुरुआत तो स्वयं भगवान शिव ने नटराज रूप में की थी, वहीं से नाच-गाना आया है।” रितेश ने कहा कि कलाकारों का अपमान सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरी संस्कृति का अपमान है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी कलाकारों ने हमेशा समाज को जोड़ा है, लेकिन कुछ लोग राजनीति की रोटियां सेंकने के लिए कलाकारों को नीचा दिखाने पर उतर आए हैं। यह मानसिकता बेहद छोटी और निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। “आप किसी के पेशे को गाली की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकते। यह संविधान की भावना के खिलाफ है। अगर कलाकारों को ‘नचनिया’ कहने वाला खुद अपराधों से घिरा हो, तो जनता को सोचना चाहिए कि असली अपराधी कौन है।” रितेश ने आगे कहा, “सम्राट चौधरी पर सात लोगों के नरसंहार का मुकदमा चल चुका है और वह छह महीने जेल में रह चुके हैं। ऐसे में अगर कोई नाम दिया जाना है तो उन्हें हत्यारा कहा जाना चाहिए, न कि वे किसी को गाली दें।”
उन्होंने कहा कि बिहार में कलाकारों को हमेशा सम्मान मिला है। चाहे वो भिखारी ठाकुर हों या आज के खेसारी लाल यादव — भोजपुरी संस्कृति का सम्मान ही बिहार की पहचान रही है। रितेश ने जनता से अपील की कि वे ऐसे नेताओं को जवाब दें जो कला और कलाकारों का मज़ाक उड़ाते हैं।
बिहार की राजनीति में अब यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला सम्मान, संस्कृति और सामाजिक गरिमा से जुड़ गया है, और कलाकार अब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं।

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