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सात दिनों में चाँदी धड़ाम, सोने में भी गिरावट, बाजार में हलचल , निवेशक सतर्क रहें

– मंहगाई के कारण आम उपभोक्ताओं और ज्वेलर्स कइके बीच डिमांड घटने के कारण तो नहीं ?
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। सात दिन में ही चांदी के दामों में 20,000 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। पिछले कुछ महीनों से लगातार ऊंचाई छू रही चांदी ने अचानक ऐसा गोता लगाया कि बाजार में हलचल मच गई। जहां एक ओर सोने की कीमतों में मामूली गिरावट आई, वहीं चांदी का भाव भरभराकर गिरा है।
पिछले सप्ताह तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का भाव 1,67,663 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था, लेकिन शुक्रवार को यह गिरकर 1,47,150 रुपये प्रति किलो रह गया। इस तरह महज सात कारोबारी दिनों में चांदी 20,513 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई। वहीं, इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार 16 अक्टूबर को चांदी की कीमत 1,68,083 रुपये प्रति किलो थी, जो सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन घटकर 1,47,033 रुपये रह गई। इस तरह कुल मिलाकर 21,050 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई। इस भारी गिरावट के पीछे कई अहम कारण हैं।
पहला बड़ा कारण त्योहारों के सीजन खासकर धनतेरस और दिवाली के बीत जाने के बाद बाजार में मांग में आई सुस्ती है। जब उपभोक्ताओं और ज्वेलर्स की डिमांड घटती है, तो कीमतों पर दबाव बनता है।
दूसरा कारण है निवेशकों की मुनाफावसूली। चांदी ने हाल ही में 1.70 लाख रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड हाई छुआ था। ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने लाभ बुकिंग शुरू कर दी, जिससे कीमतों में गिरावट आई।
तीसरा अहम कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती को माना जा रहा है। चांदी और सोना, दोनों ही डॉलर में ट्रेड होते हैं। डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों के निवेशकों के लिए चांदी महंगी हो जाती है और मांग कम होती है। बीते कुछ दिनों में डॉलर इंडेक्स में लगभग 0.8 प्रतिशत की मजबूती देखने को मिली, जिसने निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर डाला।
चौथा कारण जियोपॉलिटिकल स्थिरता से जुड़ा है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक तनाव और अमेरिका-चीन संबंधों में सुधार के संकेतों ने सेफ हेवन एसेट्स जैसे सोना और चांदी की मांग घटा दी है। जब अनिश्चितता कम होती है, तो निवेशक जोखिम वाले एसेट्स की ओर लौटते हैं और इससे कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट आती है।
पांचवां कारण ETF और कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव है। बड़े फंड्स जब अपनी होल्डिंग घटाते हैं, तो बाजार में चांदी की आपूर्ति बढ़ जाती है, जिससे कीमतें नीचे आ जाती हैं।
कुल मिलाकर, चांदी की हालिया गिरावट यह संकेत दे रही है कि निवेशकों को अब सतर्क रहने की जरूरत है। लगातार बढ़ती कीमतों के बाद बाजार में सुधार की यह स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन यदि डॉलर की मजबूती और मांग में कमी का सिलसिला जारी रहा, तो चांदी के भाव में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

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