वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को ग्रामीण रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार एक महत्वाकांक्षी पहल करने जा रही है। प्रदेश की 7500 से अधिक गोशालाओं को आधार बनाकर गांवों में पंचगव्य क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इस योजना के तहत प्रत्येक क्लस्टर में 40-40 युवाओं की टीम गठित की जाएगी, जिससे करीब तीन लाख युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलने की संभावना है।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य गोशालाओं को केवल पशु संरक्षण केंद्र तक सीमित न रखकर उन्हें ग्रामीण उत्पादन, उद्यमिता और आर्थिक विकास के केंद्र के रूप में विकसित करना है। योजना में महिला स्वयं सहायता समूहों, किसानों और ग्रामीण युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि गांवों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सके। पंचगव्य क्लस्टरों में देसी गायों से प्राप्त दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर के आधार पर विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इनमें जैविक खाद, जैविक कीटनाशक, औषधियां, धूपबत्ती, साबुन, पेंट तथा अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं शामिल होंगी। इन उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ उनके विपणन की व्यवस्था भी स्थानीय स्तर पर विकसित की जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय के स्थायी स्रोत तैयार हो सकें।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि यह मॉडल गो-आधारित उद्योगों को संगठित स्वरूप प्रदान करेगा। इससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा, किसानों की उत्पादन लागत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि पंचगव्य आधारित उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। योजना के तहत प्रत्येक गोशाला को एक क्लस्टर से जोड़ा जाएगा और 40 सदस्यीय टीम उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, विपणन और अन्य गतिविधियों का संचालन करेगी। महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि यह पहल गांवों में रोजगार सृजन, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।