वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने छह नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत अप्रेजल समिति की बैठक में इन प्रस्तावों पर विचार के बाद आवश्यक शर्तों के साथ स्वीकृति प्रदान की गई। अब इन्हें अनुमोदन के लिए राज्य स्तरीय इम्पावर्ड कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से निवेश और रोजगार के साथ किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में किसानों और उद्यमियों की आमदनी बढ़ाने के साथ युवाओं के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने अधिकारियों को नीति के तहत दी जा रही सुविधाओं और अनुदान की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक उद्यम स्थापित हो सकें। उन्होंने कहा कि किसानों के उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर उन्हें अधिक दाम दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।
अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बीएल मीणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में सोलर पावर प्लांट, राइस मिल, फ्रूट पल्प प्लांट, रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक उत्पाद, बेकरी, आइसक्रीम समेत विभिन्न खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। समिति ने परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए।
स्थानीय किसानों और उत्पादकों को परियोजनाओं से सीधे जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। स्वीकृत इकाइयों में स्थानीय कृषि और दुग्ध उत्पादकों से कच्चा माल खरीदने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के साथ किसानों के उत्पादों का स्थानीय स्तर पर ही मूल्य संवर्धन हो सकेगा।
नीति के दायरे में फल-सब्जी, दुग्ध, अनाज, दाल, तिलहन, मसाले, मशरूम, शहद, गुड़ आधारित उत्पाद, जूस-पल्प, स्नैक्स और अन्य खाद्य उत्पादों के अलावा पशु एवं मछली चारा निर्माण जैसी इकाइयां भी शामिल हैं। सरकार के अनुसार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र आने वाले समय में प्रदेश में निवेश, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का बड़ा माध्यम बनेगा।