वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने स्पष्ट किया है कि संघ को भाजपा या विश्व हिंदू परिषद के नजरिए से देखना गलत है। उन्होंने कहा कि आरएसएस, भाजपा और अन्य संगठनों की अपनी-अपनी स्वतंत्र भूमिका है और संघ किसी भी राजनीतिक दल को नियंत्रित नहीं करता। संघ का उद्देश्य सत्ता, टिकट या चुनाव नहीं, बल्कि समाज की गुणवत्ता, चरित्र निर्माण और राष्ट्र के लिए समर्पित नागरिक तैयार करना है।
भोपाल में आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ को संबोधित करते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि संघ स्वयंसेवकों को अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति का संस्कार देता है। उन्होंने कहा कि संघ में वर्दी पहनने, पथ संचलन निकालने और लाठी अभ्यास की परंपरा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आरएसएस कोई पैरा मिलिट्री फोर्स है। ऐसा सोचना पूरी तरह गलत धारणा है।
उन्होंने कहा कि संघ समाज को जोड़ने, आपसी सद्भाव, सहयोग और सकारात्मक सोच विकसित करने का कार्य करता है। स्वयंसेवक समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर सेवा कार्यों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं। डॉ. भागवत ने यह भी कहा कि संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण तक की यात्रा है और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि संघ को उसके मूल उद्देश्य और कार्यों के आधार पर समझा जाए, न कि किसी राजनीतिक चश्मे से।