– सरकार के एजेंडे में न तो शिक्षा है और न ही रोजगार
– भाजपा पहले इस्तेमाल करती है और फिर बर्बाद कर देती है
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस सरकार के एजेंडे में न तो शिक्षा है और न ही रोजगार। अगर शिक्षा और नौकरी सरकार की प्राथमिकता होती तो प्रदेश में 27 हजार प्राथमिक विद्यालय बंद न होते और 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों को आंदोलन करने के लिए मजबूर न होना पड़ता। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने विश्वविद्यालयों और विद्यालयों की स्थिति खराब कर दी है। सरकारी विश्वविद्यालयों में एक ही विचारधारा थोपकर शिक्षा की गुणवत्ता को नष्ट किया जा रहा है, जबकि निजी विश्वविद्यालय नए कोर्स और प्रयोगों से बच्चों को आगे बढ़ा रहे हैं।
श्री यादव ने शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर समाजवादी पार्टी मुख्यालय लखनऊ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भाजपा सरकार ने संस्थाओं का बहुत नुकसान किया है। संस्थानों को खत्म करने की साजिश हो रही है। उन्होंने भाजपा को “इस्तेमाली पार्टी” बताते हुए कहा कि यह पार्टी पहले इस्तेमाल करती है और फिर बर्बाद कर देती है। अब भाजपा सरकार की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि भाजपा सरकार संस्थाओं और छात्रों दोनों का भविष्य बर्बाद कर रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आयोग की जिम्मेदारी है कि कोई वोटर वंचित न रहे और फर्जी वोट न बने, लेकिन भाजपा सरकार, अधिकारियों और आयोग की तिकड़ी बन गई है। यही कारण है कि आयोग अब ‘जुगाड़ आयोग’ बन गया है और चुनावों में वोटों की डकैती खुलेआम हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उपचुनावों में भाजपा ने वोटों की जमकर हेराफेरी की। कुंदरकी और मिल्कीपुर समेत कई जगह समाजवादी पार्टी ने शिकायतें कीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे बूथ स्तर पर सजग रहें और सुनिश्चित करें कि एक भी वोट वोटर लिस्ट से कटने न पाए। उन्होंने कहा कि भाजपा जब से लोकसभा चुनाव 2024 हारी है, तभी से वह जान गई है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उसकी सरकार नहीं बचेगी।
जीएसटी पर बोलते हुए श्री यादव ने कहा कि भाजपा सरकार चुनाव को देखते हुए नया जीएसटी लाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार में महंगाई, भ्रष्टाचार और मुनाफाखोरी चरम पर है और यह हालात जल्द सुधरने वाले नहीं हैं।