वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के विद्यार्थी अब वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने की तैयारी में हैं। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) के 150 विद्यार्थियों ने अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित समाधान प्रस्तुत किए। इनमें से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 12 विद्यार्थियों की टीम बनाई गई है, जो अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में भागीदारी करेगी।
विद्यार्थियों ने अपने तकनीकी प्रेजेंटेशन ब्राविटी के सीईओ पवन शर्मा और केआईपीएल के सीईओ पराग शेंडे के समक्ष प्रस्तुत किए। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़ाकर वास्तविक समस्याओं के समाधान, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ना है। अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में विकसित हो रही तकनीकों के बीच भारतीय विद्यार्थियों की क्षमता को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। संस्थान में टेक्नोलॉजी, विधि और फॉरेंसिक विज्ञान के समन्वय से विद्यार्थियों को आधुनिक चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है। साइबर अपराध, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और डेटा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में यह ज्ञान उपयोगी साबित होगा।
टीम के सदस्य भविष्य में अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं के माध्यम से अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के अवसर तलाशेंगे। इससे विद्यार्थियों में उद्यमिता और स्टार्टअप की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। टीम में ईशानी पांडे, ईशानी ओझा, सिद्धि वत्स, साक्षी गहलोत, पुष्कर सिंह, रवि यादव, विवेक मिश्रा, प्रखर सिंह, दिव्यम श्रीवास्तव, अनिमेष शुक्ला, अनुभव चतुर्वेदी और रविशंकर कुशवाहा शामिल हैं। परियोजना का नेतृत्व संस्थान की प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट सेल प्रमुख डॉ. निमिषा सिंह कर रही हैं।