वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। राजधानी में जब्त और निरुद्ध वाहनों को रखने की वर्षों पुरानी समस्या का जल्द समाधान होने जा रहा है। परिवहन विभाग के लिए अहिमामऊ में तैयार किया गया पहला डिटेंशन-डम्पिंग यार्ड निर्माण पूरा होने के बाद अब हस्तांतरण की प्रक्रिया में है। करीब 2.55 करोड़ रुपये की लागत से बने इस यार्ड में एक साथ 237 वाहन खड़े किए जा सकेंगे। तकनीकी समिति के निरीक्षण के बाद इसे परिवहन विभाग को सौंपे जाने की तैयारी है।
83,958 वर्गफीट भूमि पर बने यार्ड में 136 हल्के वाहन, 15 भारी वाहन और 86 दोपहिया वाहनों के लिए स्थान बनाया गया है। अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर के अनुसार, अभी जब्त वाहनों को पर्याप्त जगह नहीं मिलने के कारण थानों, पी-4 पार्किंग और कल्ली यार्ड पीजीआई समेत खुले स्थानों पर खड़ा करना पड़ता है। इससे थानों पर दबाव बढ़ने के साथ यातायात और सड़क सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
यार्ड के निर्माण में मुख्य भवन, गार्ड रूम और बाउंड्रीवाल समेत अन्य कार्य कराए गए हैं। 21 अगस्त को कार्यदायी संस्था ने निर्माण पूरा होने की जानकारी दी थी। अब लोक निर्माण, ग्रामीण अभियंत्रण और सिंचाई विभाग के अभियंताओं वाली तकनीकी समिति स्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट देगी। इसके बाद हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होगी।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक लखनऊ के प्रवर्तन दलों ने 5,628 वाहनों के चालान किए हैं और 491 वाहनों को निरुद्ध किया है। पर्याप्त स्थान नहीं होने से कई मामलों में वाहन निरुद्ध करने में दिक्कत आती है। नया यार्ड शुरू होने पर कार्रवाई के बाद वाहनों को निर्धारित परिसर में सुरक्षित रखा जा सकेगा। पी-4 पार्किंग और कल्ली यार्ड में खड़े वाहनों को भी आवश्यकता के अनुसार अहिमामऊ शिफ्ट किया जा सकेगा। इससे जब्त वाहनों के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था बनेगी, थानों का दबाव घटेगा और सड़क किनारे वाहनों के जमावड़े से होने वाली यातायात समस्या कम होगी। परिवहन विभाग इसे सड़क सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम मान रहा है।