वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। राजधानी की यातायात व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों के बीच कामता चौराहे की स्थिति सवाल खड़े कर रही है। कामता चौराहे से चिनहट रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर डग्गामार वाहनों और ई-रिक्शों के बेतरतीब संचालन से रोजाना जाम की स्थिति बन रही है। हालत यह है कि सड़क पर वाहन चलने के बजाय रेंगते नजर आते हैं और आपात स्थिति में मरीज लेकर निकलने वाली एंबुलेंस भी जाम में फंस जाती है।
कामता चौराहे पर सड़क के किनारे और आसपास जगह-जगह वाहनों के खड़े होने से यातायात का दबाव और बढ़ जाता है। डग्गामार वाहन सवारियां भरने के लिए सड़क पर ही रुकते हैं, जबकि ई-रिक्शों की भीड़ यातायात की रफ्तार पर ब्रेक लगा देती है। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कामता से चिनहट रोड पर लगने वाले जाम को लेकर अदालत भी नाराजगी जता चुकी है। यातायात व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को तलब किए जाने और व्यवस्था सुधारने के निर्देशों के बावजूद स्थानीय स्तर पर अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। लगातार जाम की समस्या से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदारी तय करने और प्रभावी कार्रवाई करने में देरी क्यों हो रही है। कामता चौराहे की बदहाल यातायात व्यवस्था को लेकर पहले भी कई बार खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। पुलिस और यातायात विभाग की ओर से कार्रवाई तथा व्यवस्था सुधारने के दावे भी किए जाते रहे हैं, लेकिन मौके पर डग्गामार वाहनों और ई-रिक्शों की मनमानी पर प्रभावी अंकुश नहीं दिखता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जाम की समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि आपात सेवाओं के लिए भी गंभीर चुनौती बन रही है। एंबुलेंस के जाम में फंसने से मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। ऐसे में जरूरत है कि कामता चौराहे पर यातायात प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था लागू की जाए और नियम तोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ नियमित व सख्त कार्रवाई हो।