वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एलआईसी बीमा सखी कार्यक्रम नई मिसाल बनकर उभर रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण देकर बीमा सखी के रूप में काम से जोड़ा जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप अब तक प्रदेश में 1000 से अधिक महिलाएं सफलतापूर्वक बीमा सखी के रूप में कार्य कर रही हैं और छह माह में उन्होंने सामूहिक रूप से 2.3 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित किया है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें विकास प्रक्रिया में सहभागी और नेतृत्वकर्ता बनाना है। एलआईसी बीमा सखी कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका और स्वरोजगार उपलब्ध कराने के साथ वित्तीय जागरूकता बढ़ाने का माध्यम भी बन रहा है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अनुसार, कार्यक्रम के लिए अब तक 5000 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें स्वयं सहायता समूहों की 1000 से अधिक महिलाएं बीमा सखी के तौर पर काम कर रही हैं। योजना में बीसी सखी, बैंक सखी और अन्य सामुदायिक कैडरों को प्राथमिकता दी गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से सामाजिक विश्वास रखने वाली महिलाओं को बीमा सेवाओं के विस्तार से जोड़ा जा रहा है।
मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि बीमा सखियों ने मेहनत और समर्पण के बल पर छह माह में 2.3 करोड़ रुपये से अधिक का सामूहिक कमीशन अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि महिलाओं को प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर वे परिवार के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं। बीमा सखियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों तक बीमा और वित्तीय सुरक्षा की जानकारी पहुंच रही है। साथ ही महिलाओं को अतिरिक्त आय का साधन मिलने से उनके आर्थिक आत्मविश्वास में भी वृद्धि हो रही है। सरकार का मानना है कि स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से आने वाले समय में महिला आर्थिक सशक्तिकरण को और गति मिलेगी।