वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप) में 85वां सीएसआईआर स्थापना दिवस वैज्ञानिक उपलब्धियों, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और नए समझौतों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में स्कूल ऑफ लाइवलिहुड एंड रूरल डेवलपमेंट-यस अर्थ, असम और सीएसआईआर-सीमैप के बीच सीएसआईआर अरोमा-4.0 के तहत समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इसके माध्यम से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुगंधित फसलों की खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों को तकनीकी जानकारी, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, खेती संबंधी सहयोग और बाजार से जुड़ाव उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम में वेटिवर जड़-आधारित सक्रिय बायोचार प्रौद्योगिकी CIM-VAB का भी विमोचन किया गया। डॉ. पूजा खरे और उनकी टीम की विकसित तकनीक से आसवन अपशिष्ट को सक्रिय बायोचार में परिवर्तित किया जा सकेगा। इसके औद्योगिक उपयोग की संभावनाएं बताई गईं।
इस अवसर पर सीएसआईआर-सीमैप की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 का विमोचन हुआ। डॉ. गुंजन तिवारी और उनकी टीम द्वारा विकसित उत्तरी भारत के लिए उच्च उपज वाली मुस्कदाना किस्म ‘सिम-कस्तूरी’ भी जारी की गई। यह बेहतर बीज उत्पादन और उच्च गुणवत्ता वाले आवश्यक तेल के लिए उपयोगी है।
सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने बताया कि संस्थान छह दशक से अधिक समय से औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्षेत्र में काम कर रहा है और अब तक 160 से अधिक पादप किस्मों तथा खेती, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की तकनीकें विकसित कर चुका है। कार्यक्रम में विभिन्न उद्योगों के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उत्पादों के उन्नयन संबंधी समझौते भी हुए। सेवानिवृत्त कर्मचारियों, आश्रितों और विभिन्न पुरस्कारों के विजेताओं को सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने संस्थान का भ्रमण कर वैज्ञानिक गतिविधियों की जानकारी ली।