वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि संतुलित और पौष्टिक आहार को जीवनशैली का हिस्सा बनाना स्वस्थ जीवन की पहली आवश्यकता है। तत्कालिक स्वाद के लिए स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से बचना चाहिए। उन्होंने तेल और चीनी की खपत कम करने के प्रति लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया।
उप मुख्यमंत्री मंगलवार को होटल क्लार्क अवध में आयोजित ‘ईट राइट समिट’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक खाद्य संस्कृति में चना, सरसों का साग, मक्का और बाजरा जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ पहले से शामिल रहे हैं। आज यही खाद्य पदार्थ आधुनिक खानपान में भी लोकप्रिय हो रहे हैं। श्रीअन्न और मिलेट्स हमारी पारंपरिक खाद्य विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने से किसानों के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
केशव मौर्य ने कहा कि प्राकृतिक और आर्गेनिक उत्पादों की मांग बढ़ रही है। किसानों को इस बदलती मांग का लाभ दिलाने के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना जरूरी है। एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर किसानों और ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। फलों, सब्जियों और अन्य शीघ्र खराब होने वाली उपज के लिए भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। उपज को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने से किसानों की आय बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उप मुख्यमंत्री ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, शुद्धता और स्वच्छता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण में सरकार के साथ उत्पादकों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।