वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
प्रयागराज। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं की शिक्षा, रोजगार और डेटा से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का युवा प्रतिभा और क्षमता से भरपूर है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था ने उसे एक चक्रव्यूह में फंसा रखा है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में युवाओं के दर्द, डेटा और दौलत को चर्चा का केंद्र बनाया। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसके युवा हैं। देश में करीब 40 करोड़ युवा हैं और उनमें इंटेलिजेंस, इमेजिनेशन और क्षमता है। उनके मुताबिक यदि व्यवस्था युवाओं की क्षमता को बाधित न करे तो इसी शक्ति से देश का भविष्य तैयार होगा।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में किसी देश की प्रगति के लिए युवा शक्ति के साथ डेटा भी महत्वपूर्ण है। भारत में बड़ी मात्रा में डेटा पैदा हो रहा है। एआई का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि डेटा के बिना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने डेटा को देश की पूंजी और संपत्ति बताते हुए युवाओं के हित में उसके इस्तेमाल पर जोर दिया। शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि परिवार अपनी बचत खर्च कर युवाओं को इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य उच्च शिक्षा दिलाते हैं, लेकिन डिग्री मिलने के बाद भी रोजगार की गारंटी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि एक हजार युवाओं में केवल 12 को निजी नौकरी मिल पाती है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इंस्टाग्राम और फेसबुक की रील्स को ‘21वीं सदी का नशा’ बताते हुए कहा कि युवाओं को रील्स में उलझाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद नौकरी नहीं मिलने पर कई युवाओं को डिलीवरी और कैब सेवाओं में लंबे समय तक काम करना पड़ रहा है। कार्यक्रम में एक युवक ने अपनी परीक्षा तैयारी और आर्थिक संघर्ष का अनुभव साझा किया। राहुल गांधी ने पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था मेहनतकश युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा रही है।