वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। पर्यावरण शिक्षा, जैव विविधता संरक्षण और देश की समृद्ध वनस्पति विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में शनिवार को सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनबीआरआई) के बन्थरा स्थित महर्षि पराशर बायोरिसोर्स सेंटर में विकसित ‘प्रकृति ज्ञान धाम’ राष्ट्र को समर्पित किया गया। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री और सीएसआईआर के उपाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह ने इको-एजुकेशनल हब का उद्घाटन किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक संस्थान अब प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज की जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केंद्र विज्ञान, सतत विकास और जनभागीदारी को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय से पर्यावरण एवं जलवायु संबंधी चुनौतियों का समाधान तलाशने पर जोर दिया।
सीएसआईआर-एनबीआरआई एवं सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू के निदेशक डॉ. जाबीर अहमद ने बताया कि प्रकृति ज्ञान धाम को भारत की वनस्पति विविधता के जीवंत भंडार के रूप में विकसित किया गया है। परिसर में भारतीय विरासत उद्यान, पावन पथ, संकटग्रस्त एवं राज्यीय पौधों के उद्यान, दुर्लभ पौधों का संग्रह, नवग्रह वाटिका, नक्षत्र वाटिका और 43 प्रजातियों वाला बांस उद्यान शामिल है। क्यूआर कोड के माध्यम से पौधों की वैज्ञानिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जानकारी भी उपलब्ध होगी।
कार्यक्रम में वैज्ञानिक तकनीकों और उत्पादों का अनावरण एवं हस्तांतरण भी हुआ। पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य से संबंधित हर्बल उत्पाद हिमालया वेलनेस ने जारी किया। चार पादप आधारित तकनीकें कुडुम्बश्री, केरल को हस्तांतरित की गईं। वहीं कम लागत वाले प्रकाश-संश्लेषी जैव-रिएक्टर की तकनीक लखनऊ की विटवेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को दी गई। इस अवसर पर भारत की वनस्पति विरासत पर आधारित फिल्म का टीजर भी जारी किया गया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. जी.एन. सिंह, केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा के कुलपति डॉ. अजीत कुमार शासनी, सीएसआईआर-एनबीआरआई एवं सीएसआईआर-आईआईआईएम, जम्मू के निदेशक डॉ. ज़बीर अहमद, वरिष्ठ वैज्ञानिक, शोधकर्ता, सीएसआईआर पुष्पकृषि मिशन के लाभार्थी किसान तथा आमंत्रित अतिथिगण उपस्थित रहे।