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BBAU के शोधकर्ताओं का डिज़ाइन पेटेंटेड, स्मार्ट लाइब्रेरी की दिशा में प्रो. शिल्पी वर्मा की बड़ी उपलब्धि

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ/आगरा। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (BBAU), लखनऊ की प्रो. शिल्पी वर्मा, विक्रांत दुबे, राजीव रंजन मिश्रा एवं वीरेंद्र कुमार ने शारदा विश्वविद्यालय, आगरा के डॉ. पंकज कुमार देधा तथा अग्रवान हेरिटेज विश्वविद्यालय, आगरा की डॉ. रंजना यादव के साथ मिलकर एक उल्लेखनीय शैक्षणिक एवं तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। शोधकर्ताओं का नवोन्मेषी डिज़ाइन “स्वचालित उपकरण द्वारा बुद्धिमान पुस्तक छँटाई एवं कुशल पुस्तकालय प्रबंधन प्रणाली” भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय में आधिकारिक रूप से पंजीकृत किया गया है।
यह डिज़ाइन डिज़ाइन संख्या 474597-001 के अंतर्गत 23 सितंबर 2025 को क्लास 14-02 में पंजीकृत हुआ, जबकि इसका पंजीकरण प्रमाणपत्र 17 दिसंबर 2025 को भारत सरकार के बौद्धिक संपदा कार्यालय द्वारा जारी किया गया। यह पंजीकरण डिज़ाइन्स अधिनियम, 2000 एवं डिज़ाइन्स नियम, 2001 के प्रावधानों के अनुरूप किया गया है। इस उपलब्धि की सफल पूर्ति BBAU, लखनऊ के अनुसंधान-उन्मुख शैक्षणिक परिवेश में संभव हो सकी, जहाँ कुलपति प्रो. आर. के. मित्तल के दूरदर्शी नेतृत्व एवं सतत प्रेरणा ने नवाचार, अंतःविषयक अनुसंधान और बौद्धिक संपदा सृजन को प्रोत्साहित किया। विश्वविद्यालय के इस वातावरण ने शोधकर्ताओं को व्यावहारिक और समाधान-उन्मुख अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। यह स्वचालित प्रणाली आधुनिक पुस्तकालयों की प्रमुख चुनौती—तेजी से बढ़ते संग्रह और सीमित मानव संसाधन—का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है। बुद्धिमान पुस्तक छँटाई के माध्यम से यह उपकरण मैनुअल श्रम में कमी लाता है, त्रुटियों को न्यूनतम करता है और शैक्षणिक व शोध पुस्तकालयों में सेवा दक्षता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पेटेंट भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुप्रयुक्त अनुसंधान के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। कानूनी संरक्षण के साथ यह डिज़ाइन स्मार्ट पुस्तकालय समाधानों के पायलट कार्यान्वयन, संस्थागत अंगीकरण और संभावित व्यावसायीकरण के नए अवसर भी खोलता है।
यह उपलब्धि पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान को एक नवाचार-आधारित, तकनीक-सक्षम अनुशासन के रूप में सशक्त बनाती है और BBAU, लखनऊ सहित भारतीय विश्वविद्यालयों की उस क्षमता को रेखांकित करती है, जो डिजिटल परिवर्तन और सुदृढ़ ज्ञान अवसंरचना के राष्ट्रीय लक्ष्यों की दिशा में प्रभावी योगदान दे रहे हैं।

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