वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने कोडीनयुक्त कफ सिरप की पैरेलल सप्लाई चेन के खिलाफ प्रदेशव्यापी अभियान चलाकर बड़ा एक्शन लिया है। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बीते तीन माह में 52 जिलों में सघन जांच की गई, जिसमें 36 जनपदों में अवैध डायवर्जन का खुलासा हुआ। जांच के दौरान 161 फर्मों और संचालकों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है, जबकि 700 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध आपूर्ति जांच के दायरे में आई है।
एफएसडीए ने देश के विभिन्न राज्यों झारखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में विवेचना कर सुपर स्टॉकिस्ट और होलसेलरों के कारोबारी रिश्तों के पुख्ता साक्ष्य जुटाए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में व्यापक क्रैक डाउन शुरू किया गया, जिससे कोडीन कफ सिरप के गैर-चिकित्सीय उपयोग और अवैध तस्करी की पूरी श्रृंखला सामने आ गई। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और एसटीएफ ने एनडीपीएस और बीएनएस के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी 22 मामलों में एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई को सही ठहराया।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2024-25 में कफ सिरप की आपूर्ति वास्तविक चिकित्सीय आवश्यकता से कई गुना अधिक थी। कई फर्में वैध बिल और स्टॉक सत्यापन प्रस्तुत नहीं कर सकीं। अब तक 79 अभियोग दर्ज कर 85 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चल रहा यह अभियान अवैध नशे के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।
लाइसेंसिंग प्रणाली सख्त करने का प्रस्ताव :
मुख्यमंत्री के निर्देश पर एफएसडीए मुख्यालय द्वारा थोक औषधि विक्रय लाइसेंसिंग प्रणाली को और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें थोक प्रतिष्ठान की जीओ टैगिंग, भंडारण क्षमता की पुष्टि और इनकी फोटोग्राफ कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं प्रतिष्ठान के टेक्निकल पर्सन का अनुभव प्रमाण पत्र को ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा सत्यापन करने का भी प्रस्ताव भेजा गया है। कोडीनयुक्त कफ सिरप के निर्माण, बल्क सप्लाई, वितरण एवं निगरानी के लिए भारत सरकार से आवश्यक अधिसूचना एवं दिशा-निर्देश जारी करने के लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है।