वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। हाल ही में संपन्न हुए शीतकालीन सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही एक बार भी स्थगित नहीं हुई। यह सत्र न केवल अनुशासित और सुचारु संचालन का उदाहरण बना, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के सशक्त पालन का भी साक्षी रहा। इस सत्र में वंदे मातरम् पर सदन में विस्तृत, सकारात्मक और सार्थक चर्चा हुई, जिसमें अधिकांश विधायकों ने सक्रिय सहभागिता की। आज़ादी के बाद पहली बार सर्वसहमति से सदन में वंदे मातरम् गीत का पूर्ण गायन हुआ, जिसे विधानसभा के इतिहास का एक स्मरणीय और ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।
शीतकालीन सत्र के समापन के बाद पत्रकारों से बातचीत में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि अब विधेयकों पर अधिकाधिक सदस्यों को चर्चा का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस सत्र में विधेयकों में संशोधन के लिए सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिला। सदस्यों से अपेक्षा की गई कि वे विषय पर केंद्रित रहकर चर्चा करें और सदन में आने से पूर्व विधेयकों का अध्ययन अवश्य करें। कई विधायकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सार्थक विधायी विमर्श की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उल्लेखनीय है कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश पेंशन की हकदारी तथा विधि मान्यकरण विधेयक, 2025. उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (तृतीय संशोधन) विधेयक 2025. उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) विधेयक 2025. उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (चतुर्थ संशोधन) विधेयक 2025. उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (पंचम संशोधन) विधेयक 2025. उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार (प्रावधानों का संशोधन विधेयक 2025). उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (संशोधन विधेयक)2025. उत्तर प्रदेश दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान (संशोधन) विधेयक 2025. उत्तर प्रदेश ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक 2025. उत्तर प्रदेश गन्ना उपकर निरसन विधेयक 2025. किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश (संशोधन) 2025 तथा उत्तर प्रदेश विनियोग (2025 2026) का अनुपूरक विधेयक 2025 पारित किए गए।
अध्यक्ष ने कहा कि उनके कार्यकाल में विधायकों के साथ विभिन्न चरणों में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं और आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी। उनका उद्देश्य सदस्यों को विधायी प्रक्रिया से गहराई से जोड़ना है। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा भ्रमण के प्रति आमजन की बढ़ती रुचि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति बढ़ते विश्वास और जागरूकता का प्रमाण है।
सतीश महाना ने जानकारी दी कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का उद्घाटन 19 जनवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे। सम्मेलन में 20 और 21 जनवरी को विभिन्न संसदीय विषयों पर विचार-विमर्श होगा और समापन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा किया जाएगा।