वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। साल 2025 भारतीय कृषि के लिए एक नए युग की शुरुआत के रूप में दर्ज हुआ है। यह वर्ष आत्मनिर्भरता, रिकॉर्ड उत्पादन और किसानों के बढ़ते भरोसे का प्रतीक बनकर सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में किए गए कृषि सुधारों का समेकित परिणाम अब जमीन पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कभी कम उत्पादकता, आयात निर्भरता और आय की अनिश्चितता से जूझने वाली कृषि व्यवस्था आज मजबूत, वैज्ञानिक और भविष्य उन्मुख बन चुकी है।
2025 की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि कृषि नीतियां बिखरी योजनाओं से आगे बढ़कर मिशन आधारित दृष्टिकोण में बदलीं। केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत 100 कम प्रदर्शन वाले जिलों पर विशेष फोकस किया गया। 24 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक प्रावधान के साथ यह योजना सिंचाई, भंडारण, तकनीक, प्रशिक्षण और ऋण को एकीकृत कर 1.7 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचाने की दिशा में प्रभावी साबित हुई।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन ने भी किसानों को नई मजबूती दी। तुअर, उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत एमएसपी पर खरीद की चार साल की गारंटी से किसानों की आय में स्थिरता आई और देश की पोषण सुरक्षा सुदृढ़ हुई। वहीं कपास मिशन ने कृषि और उद्योग के बीच सेतु बनाते हुए वस्त्र एवं एमएसएमई क्षेत्र को नई गति दी।
इन सुधारों का असर रिकॉर्ड उत्पादन में दिखा। वर्ष 2024-25 में 357.73 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन के साथ भारत ने नया कीर्तिमान बनाया। एमएसपी को वास्तविक आय सुरक्षा का माध्यम बनाकर किसानों का भरोसा और मजबूत हुआ। विज्ञान, तकनीक और सतत विकास पर जोर ने 2025 को भारतीय कृषि के लिए आत्मविश्वास और स्थिर प्रगति का वर्ष बना दिया, जो विकसित भारत की मजबूत आधारशिला है।