वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। साल 2025 की अंतिम कालाष्टमी इस बार विशेष संयोग लेकर आ रही है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली कालाष्टमी भगवान शिव के रक्षक स्वरूप काल भैरव को समर्पित होती है। मान्यता है कि इस दिन भैरव उपासना से भय, बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और ग्रहदोषों से मुक्ति मिलती है। दिसंबर महीने में अष्टमी तिथि 11 दिसंबर 2025, गुरुवार दोपहर 01:57 बजे शुरू होकर 12 दिसंबर शुक्रवार सुबह 02:56 बजे समाप्त होगी। ऐसे में अंतिम कालाष्टमी और कालभैरव जयंती 11 दिसंबर को मनाई जाएगी।
पुराणों में वर्णित है कि कालभैरव जयंती पर विशेष उपाय करने से कालसर्प दोष, पितृदोष और शनि जनित पीड़ा में उल्लेखनीय कमी आती है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा, टोने-टोटके या भूत-प्रेत बाधा का अनुभव हो रहा हो तो इस रात “भैरव अष्टक” का पाठ अत्यंत प्रभावी माना जाता है। सरसों के तेल का दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष या शनि का प्रकोप हो, उन्हें काल भैरव मंदिर में नींबू चढ़ाने और “ॐ ह्रीं कालभैरवाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करने की सलाह दी जाती है। आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए मंगलवार और शनिवार को काले कुत्ते को रोटी खिलाना शुभ माना गया है। जो लोग भय, तनाव या अनिद्रा से परेशान हों, वे घर की दक्षिण दिशा में भैरव यंत्र स्थापित कर प्रतिदिन इसकी पूजा करें। इससे मानसिक शांति मिलती है और भय खत्म होकर आत्मविश्वास बढ़ता है।
कालाष्टमी पर जरूर करें इन मंत्रों का जाप :
ओम शिवगणाय विद्महे गौरीसुताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात।।
ओम कालभैरवाय नम:।
ओम भ्रां कालभैरवाय फट्।
धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्।
द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।