– एमएसएमई ने खोले रोजगार के द्वार, दो करोड़ से अधिक युवाओं को मिला सहारा
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के लक्ष्य की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार की रोजगार नीति महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरी है। पिछले आठ वर्षों में प्रदेश में रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। बेरोजगारी दर, जो कभी 19 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, घटकर अब 2.4 प्रतिशत रह गई है। यह गिरावट न केवल आर्थिक मजबूती का संकेत है, बल्कि रोजगार आधारित विकास मॉडल की सफलता को भी प्रमाणित करती है।
सरकार की नीति-आधारित पहल, निवेश को बढ़ावा देने वाले कदम और कौशल विकास कार्यक्रमों ने युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। यूपी की जीसीसी नीति 2025 के तहत दो लाख से अधिक नई नौकरियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे युवाओं को वैश्विक कंपनियों के साथ काम करने का मौका मिल रहा है। रोजगार मिशन ने मात्र एक वर्ष में 1.25 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराकर रोजगार सृजन की गति बढ़ाई है।
एमएसएमई सेक्टर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनकर सामने आया है। वर्तमान में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हो रही हैं, जिन्होंने 2 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित किए हैं। पिछले एक वर्ष में ही 18 लाख लोगों को इस क्षेत्र से रोजगार मिला है। कौशल विकास मिशन के तहत 14 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 5.66 लाख को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भी प्रदेश में सामाजिक परिवर्तन का संकेत देती है। औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
रोजगार महाकुंभ 2025 जैसे आयोजनों और वित्तीय योजनाओं ने रोजगार में पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ावा दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार अवसरों ने पलायन कम किया है और जीवन स्तर में सुधार लाया है। योगी सरकार का यह मॉडल विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के लक्ष्य की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहा है।