वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर चुनावी व्यवस्था में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और मतदाताओं के नाम काटने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने सभी विपक्षी दलों और एनडीए के सहयोगी दलों से एकजुट होकर इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाने और लोकतंत्र विरोधी षड्यंत्र का पर्दाफाश करने की अपील की।
अखिलेश यादव ने कहा कि यह लोकतंत्र के साथ धोखाधड़ी है, जिसकी शुरुआत मतदाता सूची से हो रही है और आगे चलकर यह नागरिक अधिकारों, संपत्ति और आरक्षण जैसे संवैधानिक स्तंभों तक पहुंच सकती है। उन्होंने चेताया कि भाजपा जिसे आज अपना सहयोगी मान रही है, सबसे पहले वही उसके निशाने पर होगा। श्री यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) पर दबाव बनाकर मतदाता सत्यापन प्रपत्र को ‘थर्ड ऑप्शन’ में सबमिट करवाया जा रहा है, जिससे 9 दिसंबर 2025 को मतदाता सूची के ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद करोड़ों मतदाताओं को नोटिस भेजकर दस्तावेज़ मांगे जाएंगे। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया के चलते 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची में अधिकतर नाम डिलीट रहेंगे।
अखिलेश यादव ने मांग की कि मतदाता सत्यापन की दिक्कतों को देखते हुए 9 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन को तीन माह आगे बढ़ाकर नए सिरे से नियमानुसार सत्यापन कराया जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और सरकार की तिकड़ी चुनावी व्यवस्था का अपहरण कर रही है, जिसे सामूहिक जनप्रतिरोध से ही बचाया जा सकता है।