वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इटावा जनपद के बडपुरा स्थित महर्षि बाल्मीकि आश्रम और प्राचीन बाल्मीकि मंदिर को धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर विशेष पहचान दिलाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थल विकास योजना के तहत इस परियोजना के लिए 70 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार समाज के हर वर्ग की आस्था का सम्मान करते हुए धार्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक स्थलों के संरक्षण और संवर्धन को प्राथमिकता दे रही है। महर्षि वाल्मीकि आदिकवि और रामायण के रचनाकार हैं, जिनसे जुड़ी यह तपोभूमि हमारी विरासत और सांस्कृतिक चेतना का अहम आधार है।
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत मंदिर और आश्रम परिसर का सौंदर्यीकरण, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, सूचना केंद्र और शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे स्थानीय पर्यटन को गति मिलने के साथ जनपद की पौराणिक धरोहर को नई प्रतिष्ठा मिलेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार बेला के बेला गांव में महर्षि बाल्मीकि ने जीवन का लंबा कालखंड व्यतीत किया था, जो आज उनकी तपोस्थली और समाधि स्थल के रूप में पूजित है। यहां स्थापित महर्षि की प्रतिमा और पादुका के दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। उनकी समाधि यमुना के तट पर स्थित है।
जयवीर सिंह ने कहा कि इटावा में पहले से मौजूद सफारी पार्क, चंबल वन्य जीव अभ्यारण्य, यमुना–चंबल संगम और सरसई नावर वेटलैंड जैसे स्थल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। वर्ष 2024 में 12,22,055 पर्यटक इटावा पहुंचे थे, जबकि 2025 के जनवरी से मार्च में ही यह संख्या 10,39,243 तक पहुँच गई, जो पर्यटन बढ़ोतरी का स्पष्ट संकेत है। विभाग को भरोसा है कि आमजन की आस्था और बेहतर सुविधाओं के समावेश से यह स्थल आने वाले समय में एक प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित होगा।