वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
पटना। बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की वापसी के साथ ही राजनीतिक पारे में एक बार फिर उबाल आ गया है। सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी किया है। यह बंगला उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री होने की हैसियत से आवंटित हुआ था, लेकिन 2019 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जाने वाली सरकारी आवासीय सुविधाओं की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद सरकार ने राबड़ी देवी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते 39, हार्डिंग रोड स्थित नया और बड़ा आवास आवंटित किया है। इसके बावजूद लालू परिवार पुराने बंगले को खाली नहीं कर रहा, जिससे सियासत और तीखी हो गई है।
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इस नोटिस को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मगनी लाल मंडल ने स्पष्ट रूप से एलान किया कि 10 सर्कुलर रोड का बंगला किसी भी सूरत में खाली नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि जो करना हो कर लें, हम डेरा नहीं छोड़ेंगे। आरजेडी ने यह भी संकेत दिया है कि वे इस मसले को अदालत तक ले जाएंगे और इसे कानूनी मोर्चे पर उलझाए रखने की रणनीति बना चुके हैं।
आरजेडी के भीतर बंगला बचाए रखने की जंग के पीछे महज आवास नहीं, बल्कि नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी का मंडराता संकट है। 75 सदस्यीय विधान परिषद में आरजेडी के फिलहाल 13 सदस्य हैं, जबकि नेता प्रतिपक्ष बने रहने के लिए न्यूनतम 9 सदस्यों की अनिवार्यता होती है। आने वाले वर्षों में आरजेडी के दो एमएलसी का कार्यकाल 2026 में, सात का 2028 में और चार का 2030 में खत्म होगा। विधानसभा चुनाव 2025 के बाद पार्टी विधायकों की संख्या 75 से घटकर 25 रह गई है, जिससे विधानसभा कोटे और स्थानीय निकाय कोटे की एमएलसी सीटें बचाए रखना अब कठिन माना जा रहा है। सियासी समीकरणों के आधार पर 2026 और 2028 में खाली होने वाली सीटें एनडीए के खाते में जा सकती हैं, जिससे 2028 तक आरजेडी की एमएलसी संख्या 9 या उससे भी नीचे खिसकने का अनुमान है। चिंता की असल वजह यह है कि हार्डिंग रोड वाला बंगला नेता प्रतिपक्ष के नाते मिला है। यदि 2028 में यह पद हाथ से गया, तो 39, हार्डिंग रोड का आवास भी खाली कराना पड़ेगा। यही डर लालू परिवार की जिद का केंद्र बन गया है।
मगनी लाल मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सवाल उठाते हुए कहा कि 20 वर्षों में सत्ता कई बार बदली, लेकिन बंगला कभी मुद्दा नहीं बना, अब अचानक यह विषय क्यों उठा? उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाजपा की रणनीति हो सकती है और गृह विभाग भाजपा कोटे में जाने के बाद उनका परिवार अपमानित करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल यह प्रकरण कानूनी बहस, राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप और बदलते विधान परिषद समीकरणों के बीच राज्य की राजनीति में बड़े तूफान का संकेत दे रहा है।