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चीन से आयातित पार्ट्स और स्क्रैप से तैयार होते थे मोबाइल, IMEI बदलने का खेल, अवैध फैक्ट्री का पर्दाफाश

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ/नई दिल्ली। टेलीकॉम सेक्टर में अवैध गतिविधियों पर प्रहार करते हुए दिल्ली पुलिस ने करोल बाग थाना क्षेत्र में ऑपरेशन ‘CyberHawk’ और विशेष मुहिम ‘CyberHawk’ के तहत एक संगठित मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और IMEI टैंपरिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया है। करोल बाग के बीदनपुरा स्थित गली नंबर 22, बीदनपुरा की एक बहुमंजिला इमारत के चौथे तल पर चल रही इस अवैध असेंबलिंग यूनिट पर 20 नवंबर 2025 को की गई छापेमारी में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मौके से 1,826 अवैध रूप से निर्मित मोबाइल फोन, हजारों मोबाइल बॉडी पार्ट्स, IMEI स्कैनर, IMEI टैंपरिंग सॉफ्टवेयर, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए, जो नेटवर्क की व्यापकता का प्रमाण हैं।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह पिछले दो वर्षों से गुपचुप तरीके से सक्रिय था। आरोपी स्क्रैप डीलर्स से पुरानी और प्रयुक्त मदरबोर्ड खरीदते थे और नए बॉडी पार्ट्स चीन से आयात किए जाते थे। इन मदरबोर्ड और पार्ट्स को जोड़कर नई शक्ल में मोबाइल तैयार किए जाते थे, जिनमें कोई वैध IMEI दर्ज नहीं होती थी। असेंबलिंग के बाद ‘WriteIMEI 0.2.2’ और ‘WriteIMEI 0.2.2’ जैसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर मोबाइल में नई IMEI लिखी जाती थी, ताकि इन फोनों को ट्रैक करना असंभव जैसा हो जाए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया ने अवैध फोनों को वैध डिवाइस जैसा रूप दिया, जिससे इन्हें स्थानीय बाजार में आसानी से खपाया जाता रहा।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अशोक कुमार (फैक्ट्री मालिक), रामनारायण, धर्मेंद्र कुमार, दिपांशु और दीपक के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि चीन से पार्ट्स मंगाने के लिए अनौपचारिक सप्लायरों और संदिग्ध लॉजिस्टिक्स चैनल का उपयोग किया जाता था, जबकि तैयार मोबाइल करोल बाग और आसपास के इलाकों के खुदरा बाजार में सप्लाई किए जाते थे। पुलिस अब चीन से खरीद, शिपमेंट मॉड्यूल, वितरण नेटवर्क, बिचौलियों और अवैध मोबाइल खरीदने वाले संभावित ग्राहकों की पहचान पर विस्तृत जांच कर रही है।
करोल बाग थाना पुलिस पिछले 15 दिनों से मोबाइल से जुड़े अवैध कारोबार पर निगरानी रख रही थी, जिसके आधार पर इस ऑपरेशन को अंतिम रूप दिया गया। पुलिस आयुक्तालय स्तर के साइबर सेल और तकनीकी टीम की मदद से रैकेट के उपकरण, आईटी लॉग और IMEI राइटिंग मॉड्यूल को सीज़ कर डिजिटल फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई दूरसंचार क्षेत्र में आईएमईआई टैंपरिंग के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कानूनी चोट है, जिससे अवैध मैन्युफैक्चरिंग मॉडल और इसके आर्थिक–सुरक्षा प्रभावों पर नया विमर्श शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश मुख्यालय से इस कार्रवाई की क्रॉस–स्टेट सप्लाई एंगल पर भी सूचनाएं साझा की जा रही हैं, ताकि अन्य राज्यों में फैले मॉड्यूल भी रडार पर आ सकें। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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