Breaking News

आत्मनिर्भर भारत व नारी सशक्तीकरण की दिशा में एक और चरण

– चार श्रम संहिताएं श्रमिकों के जीवन में आएगा नया सूर्योदय
मृत्युंजय दीक्षित
आत्मनिर्भर भारत और नारी सशक्तीकरण की दिशा में श्रम सुधारों का एक नया चरण सामने आया है, जिसे चार श्रम संहिताओं के रूप में जाना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लंबे समय से श्रम सुधारों पर कार्य कर रही है। इन संहिताओं का उद्देश्य श्रमिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक बनाना है। सरकार का दावा है कि ये सुधार श्रमेव जयते की मूल भावना को साकार करते हैं और श्रमिक कल्याण को केंद्र में रखते हैं।
वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता 2020 के माध्यम से पहली बार देश में वेतन, कार्यस्थल सुरक्षा और श्रमिक अधिकारों के लिए एक समावेशी और संगठित आधार तैयार किया गया है। इन क़ानूनों के ज़रिये समय पर वेतन, न्यूनतम मज़दूरी की गारंटी और सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। सरकार द्वारा अयोध्या में राम मंदिर, संसद भवन और भारत मंडपम जैसे राष्ट्रीय आयोजनों में श्रमिकों को सार्वजनिक मंच से सम्मानित किया जाना भी श्रम वर्ग के प्रति बदलते दृष्टिकोण का प्रतीक बताया जा रहा है।
महिला श्रमिकों के लिए ये संहिताएं एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आई हैं। श्रम इतिहास में पहली बार सभी क्षेत्रों में रात्रि पाली में काम की अनुमति अनिवार्य सुरक्षा शर्तों के साथ दी गई है, लेकिन यह पूरी तरह से उनकी स्वैच्छिक सहमति पर आधारित है। खनन सहित सभी उद्योगों में महिलाओं को काम करने की छूट मिलने से रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। समान काम समान वेतन, 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व लाभ और शिशु पालन के तहत घर से काम करने की सुविधा जैसे प्रावधान नारी सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर माने जा रहे हैं।
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार कानूनी परिभाषा में शामिल करना भी इन सुधारों की बड़ी विशेषता है। रैपिडो, ओला, उबर, जोमैटो, स्विगी जैसे क्षेत्रों में कार्यरत युवाओं और कामगारों को पहचान मिलने से वे भी सामाजिक सुरक्षा दायरे में आएंगे। 29 पुराने श्रम कानूनों को समाहित कर इन्हें सरल और व्यापक स्वरूप दिया गया है, जिससे श्रमिक शोषण रोकने का दावा किया जा रहा है।
उद्योग और विशेषज्ञ वर्ग का मानना है कि इन सुधारों से श्रमिकों की दशा बदलेगी और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को नई गति मिलेगी। सरकार इन्हें आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निर्णायक कदम के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जिससे श्रमिक जीवन में एक नए सूर्योदय की उम्मीद जगाई जा रही है।

Check Also

स्टार्टअप इंडिया के 10 साल: राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव बना भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार लखनऊ। स्टार्टअप इंडिया के दस वर्ष पूरे होने के …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Live Updates COVID-19 CASES