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“साहित्य, अधिवक्ता और पत्रकार—तीनों समाज के दर्पण : अनुपम चौहान

–दिनकर दर्शन संगोष्ठी में साहित्य और कानून का संगम, मानवता और जीवन मूल्यों पर हुआ सार्थक विमर्श
वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। दर्शन चेरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में लखनऊ बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित दिनकर दर्शन साहित्य प्रवाह संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में साहित्यकारों और अधिवक्ताओं का अनोखा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में राजधानी के वरिष्ठ साहित्यकारों, अधिवक्ताओं और पत्रकारों ने साहित्य, कानून और समाज में मानवता के मूल्यों पर विचार साझा किए। स्वागत भाषण में केसरिया स्वर के संरक्षक देव किशोर शर्मा ने कहा कि यह संगोष्ठी साहित्य और विधि जगत के बीच सेतु का कार्य करेगी और समाज में संवेदनशीलता को नई दिशा देगी।
मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. हरिशंकर मिश्र ने कहा कि “साहित्य और कानून का गहरा संबंध है। अनेक अधिवक्ताओं ने साहित्य को नई ऊंचाइयां दी हैं—महामना मालवीय जैसे व्यक्तित्व इसका उदाहरण हैं।” उन्होंने कहा कि “वही साहित्य सच्चा है जिसमें मानवता और जीवन-मूल्य झलकते हैं।”
वरिष्ठ पत्रकार अनुपम चौहान ने कहा कि “साहित्य, अधिवक्ता और पत्रकार—तीनों समाज के दर्पण हैं। साहित्यकार दिशा देता है, अधिवक्ता न्याय का आधार बनता है और पत्रकार समाज की निगरानी करता है।” अंत में लखनऊ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश प्रसाद तिवारी ने कहा कि ऐसे आयोजन युवा अधिवक्ताओं में ऊर्जा भरते हैं और वरिष्ठों में सहयोग तथा शालीनता की भावना को प्रोत्साहित करते हैं।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत फूलमालाओं, शॉल और मोमेंटो भेंटकर किया गया। इस अवसर पर रमेश प्रसाद तिवारी, ब्रजभान सिंह भानू, डॉ. हरिशंकर मिश्र, शरद सिंह शरद, अनुपम चौहान, हरिश्चंद्र सिंह, रामकुमार गुप्ता, शरद मिश्र सिंधू, एडवोकेट मीनाक्षी मनू वर्मा, अनुपम पांडेय और आशीष यादव सहित अनेक साहित्यप्रेमी व अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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